'सच दबाने की कोशिश!', सोनिया गांधी की किताब से पन्ने हटने पर भड़की झारखंड कांग्रेस

नटवर सिंह की आत्मकथा 'वन लाइफ इज नॉट एनफ' से सोनिया गांधी से जुड़े कुछ अंशों को हटाए जाने के मामले पर राजनीति गरमा गई है. झारखंड कांग्रेस ने इसे केंद्र सरकार और विरोधियों की साजिश करार दिया है.

रांची : पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के दिवंगत नेता नटवर सिंह की आत्मकथा 'वन लाइफ इज नॉट एनफ' से सोनिया गांधी से जुड़े कुछ विवादित अध्यायों व अंशों को हटाए जाने के मामले पर राजनीति गरमा गई है. झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस पूरे घटनाक्रम को केंद्र सरकार और राजनीतिक विरोधियों की सोची-समझी साजिश करार दिया है. पार्टी का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के कारण प्रकाशक पर दबाव बनाकर इतिहास के सच को सामने आने से रोका जा रहा है.

प्रकाशक पर दबाव बनाकर सच को रोकने का आरोप

झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने रांची में मीडिया से बातचीत करते हुए इस मुद्दे पर कड़ा एतराज जताया. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस पूरी कवायद के पीछे प्रकाशक पर बनाया जा रहा राजनीतिक दबाव काम कर रहा है. राकेश सिन्हा ने कहा कि किताब से चुनिंदा अंशों या अध्यायों को हटाया जाना पूरी तरह से अनुचित और गलत है. जब कोई व्यक्ति अपने व्यक्तिगत अनुभवों और ऐतिहासिक घटनाक्रमों के आधार पर कोई किताब लिखता है, तो किसी को भी उस किताब या सच से डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए. लेकिन कुछ लोग सच उजागर होने के डर से इसे दबाने का प्रयास कर रहे हैं."

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क्या है सोनिया गांधी की आत्मकथा और नटवर सिंह का विवाद?

नटवर सिंह की संस्मरण पुस्तक 'वन लाइफ इज नॉट एनफ' के प्रकाशन के समय 2004 में यूपीए-1 सरकार के गठन और सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री पद न स्वीकारने के फैसले को लेकर कई सनसनीखेज दावे किए गए थे. नटवर सिंह ने अपनी किताब में लिखा था कि राहुल गांधी के कड़े विरोध और अपनी जान के खतरे की आशंका के कारण सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री बनने से इनकार किया था, न कि अपनी 'अंतरात्मा की आवाज' पर. इस किताब को लेकर सोनिया गांधी ने खुद अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और इसे तथ्यों से परे बताया था. विवाद तब शुरू हुआ जब किताब के नए संस्करण या डिजिटल प्रारूप से कुछ विवादित अध्यायों को हटाए जाने की चर्चाएं सामने आईं, जिस पर कांग्रेस नेताओं का मानना है कि सत्ता पक्ष सच को अपने हिसाब से मोड़ना चाहता है.

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लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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