रांची. झारखंड अलग राज्य आंदोलन, जन अधिकारों एवं मानवाधिकार आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी की निंदा की है. कार्यकर्ताओं ने उन्हें रिहा करने और लद्दाख के लिए केंद्र सरकार द्वारा किये गये वादों को पूरा करने की मांग की है. कार्यकर्ताओं द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह कार्रवाई न सिर्फ लद्दाख के लोगों की आवाज को दबाने का प्रयास है, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा इस क्षेत्र की स्वायत्तता, विकास और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए किये गये वादों को भी खारिज करती है. कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे लद्दाख के लोगों की अलग राज्य, संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और लद्दाख घाटी के बेरोजगार युवाओं के लिए तत्काल रोजगार के अवसरों की मांगों के साथ एकजुटता में खड़े हैं. पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक न्याय के लिए शांतिपूर्ण ढंग से वकालत करनेवाले सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी, भारतीय संविधान में निहित मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. कहा गया कि लेह में हुई अनावश्यक हिंसा के लिए सोनम वांगचुक को दोषी ठहराना और उन्हें गिरफ्तार करने से स्थिति और तनावपूर्ण होगा, जबकि सोनम वांगचुक ने स्पष्ट रूप से हिंसा की निंदा की और हिंसा को अस्वीकार करते हुए 15 दिनों में अपना अनशन वापस ले लिया था. सोनम की गिरफ्तारी का विरोध करनेवालों में आदिवासी स्त्रीवादी मंच की रजनी मुर्मू, नारी शक्ति क्लब/झारखंड जनाधिकार महासभा की आलोका कुजूर, झारखंड जनतांत्रिक महासभा के दीपक रंजीत, झारखंड राज्य घरेलू महिला कामगार यूनियन की संगीता बेक, महिला उत्पीड़न विरोधी एवं विकास समिति की लक्ष्मी गोप, झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के महासचिव पुष्कर महतो, झारखंड आंदोलनकारी सेनानी के सह संस्थापक गौतम कुमार बोस, विश्वजीत प्रमाणिक, अजय एक्का, अमन मरांडी सहित अन्य शामिल है.
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