रांची. मौसम में अचानक बदलाव होने और उसके अनुरूप अपने को ढालने में लोग परेशान हैं. कभी ठंड तो कभी गर्मी से लोगों की दिनचर्या बदल जा रही है. सर्द हवा होने से गर्म कपड़ा पहनना पड़ता है, तो अगले ही दिन तापमान बढ़ने से गर्म कपड़ा उतारना पड़ता है. तापमान में इस उतार-चढ़ाव से लोग मौसमी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं. अस्पतालाें के ओपीडी में मौसमी बीमारी से पीड़ित मरीजों की भीड़ बढ़ रही है. रिम्स और सदर अस्पताल के मेडिसिन ओपीडी में 35 से 40 फीसदी मौसमी बीमारी से पीड़ित लोग इलाज कराने पहुंच रहे हैं. रिम्स में शनिवार को मेडिसिन विभाग में 45 और चेस्ट एंड टीबी विभाग में 55 ऐसे मरीजों को डॉक्टरों ने दवाएं लिखी. सबसे ज्यादा परेशानी खांसी से राहत नहीं मिलने की वजह से हो रही है. घरेलू नुस्खा भी काम नहीं आ रहा है, इसलिए शीघ्र राहत की चाह में लोगों को एलोपैथी दवा का सहारा लेना पड़ रहा है. तीन से चार हफ्ते में भी खांसी नहीं छूट रही है. रुक-रुक कर हल्की खांसी से लोग ज्यादा परेशान हैं. वहीं, डॉक्टरों मरीजों को पोस्ट कोविड की वजह बताकर इम्यूनिटी बढ़ाने का परामर्श दे रहे हैं. खान पान में मौसमी साग-सब्जी और फल की मात्रा बढ़ाने की सलाह दी जा रही है.
बच्चों में भी बढ़ी परेशानी, अभिभावक परेशान
मौसम में बदलाव का सबसे ज्यादा असर बच्चों में देखने को मिल रहा है. यह इसलिए कि बच्चे मौसम के अनुरूप लाइफ स्टाइल अपनाने को तैयार नहीं हो रहे हैं. शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अनिताभ कुमार ने बताया कि बच्चे स्कूल के दौरान अपने हिसाब से खानपान को अपना रहे हैं. कई बच्चे तो गर्मी का अहसास होने पर आइस्क्रीम और साफ्ट ड्रिंक का उपयोग कर ले रहे हैं. यही बीमारी का कारण बन रहा है. वहीं, अभिभावक परेशान इसलिए हैं, क्योंकि अधिकांश स्कूलों में वार्षिक परीक्षा शुरू होनेवाली है. उनकी चिंता है कि बीमार हाेने से परीक्षा न छूट जाये.सावधानी बरतनी होगी
मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ विद्यापति ने कहा कि मौसम में बदलाव हो रहा है, इसलिए कुछ दिन तक सावधानी बरतनी होगी. फ्रीज और ठंडे खाद्य पदार्थ का सेवन नहीं करें. फल और मौसमी साग-सब्जी का इस्तेमाल प्रचूर मात्रा में करें.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
