आदिवासियों के संगठित होने से कुछ लोग डरते हैं : हेमंत सोरेन

जब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, तब आजादी का पहला बिगुल फूंकने वाले आदिवासी समाज के वीर योद्धा ही थे.

रांची. जब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, तब आजादी का पहला बिगुल फूंकने वाले आदिवासी समाज के वीर योद्धा ही थे. आदिवासी समाज सदियों से संघर्ष करता रहा है. आज आदिवासी समाज राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और बौद्धिक रूप से कमजोर है और इसके पीछे सामंतवादी सोच रखने वाले लोगों की बड़ी भूमिका रही है. कुछ लोगों को डर है कि यदि आदिवासी, दलित, शोषित और वंचित समाज शिक्षित और संगठित हो गया, तो उनके वर्चस्व का अंत हो जायेगा. ये बातें सीएम हेमंत सोरेन ने असम के तिनसुकिया में आयोजित आदिवासी महासभा में कहीं. उन्होंने कहा कि इन ताकतों ने तो बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर को भी नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

सरकार ने लोगों को जागरूक किया

इससे पहले रविवार को सीएम एक दिवसीय असम दौरे पर तिनसुकिया पहुंचे. वह ऑल आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ असम (एएएसएए) की आदिवासी महासभा में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए. सीएम ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया और अंग्रेजों से सबसे पहले लोहा लेने का काम किया. उन्होंने कहा कि राज्य की बागडोर संभालने के बाद उनकी सरकार ने प्रखंड-प्रखंड, गांव-गांव और टोला-टोला जाकर लोगों को जागरूक किया. झारखंड की करीब 55 लाख महिलाओं को मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत प्रतिमाह 2500 रुपये की सहायता राशि दी जा रही है. मौके पर सीएम हेमंत सोरेन ने असम के आदिवासी नेता स्वर्गीय प्रदीप नाग और प्रसिद्ध गायक स्वर्गीय जुबिन गर्ग को श्रद्धांजलि अर्पित की. इस अवसर पर मंत्री चमरा लिंडा, सांसद विजय हांसदा, विधायक मो ताजुद्दीन उर्फ एमटी राजा, एएएसएए सेंट्रल कमेटी के अध्यक्ष रेजन होरो और उपाध्यक्ष डेविड तिर्की सहित असम के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग उपस्थित थे.

असम में रहने वाले आदिवासियों की मदद के लिए पूरा झारखंड तैयार

मुख्यमंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि आज देश के विभिन्न हिस्सों में आदिवासी समाज को अपने हक-अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर असम में रहने वाले आदिवासियों की मदद के लिए पूरा झारखंड खड़ा रहेगा. आदिवासी समाज की एकजुटता ही हमारी पहचान है. झारखंड या असम के किसी भी आदिवासी पर अत्याचार होता है, तो न सिर्फ झारखंड, बल्कि पूरे देश के आदिवासी एकजुट होकर इसका विरोध करेंगे.

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By Prabhat gopal jha

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