रांची. रांची और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में 21 अक्तूबर को मवेशियों की पूजा का पर्व सोहराई मनाया जायेगा. इस पर्व को आदिवासी मूलवासी दोनों ही मनाते हैं. मवेशियों के रखने के गोहार की साफ-सफाई कर उसे लीपा-पोता जायेगा. इसके बाद गाय-भैंसों व बैल आदि को नजदीकी जलस्रोत (नदी-तालाब) आदि में ले जाकर नहलाया जायेगा. गोहार घर में मवेशियों की पूजा की जायेगी. उन्हें सिंदूर व चावल के घोल से बना टीका लगाया जायेगा. इसके बाद मवेशियों को घास खिलाकर उन्हें सजाया जायेगा. गौरतलब है कि यह पर्व झारखंडी की साझा संस्कृति में मवेशियों के लिए कृतज्ञता ज्ञापन करने के लिए मनाया जाता है. माना जाता है कि गाय बैलों की वजह से गांव घर में खुशहाली और धन धान्य हो पाता है. मवेशियों द्वारा साल भर कृषि कार्यों में सहायता मिलती है. सोहराई के दिन उनकी पूजा कर कृतज्ञता व्यक्त की जाती है.
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