Ranchi news : शिवा ट्रेडिंग कंपनी के पंपसेट और ट्रैक्टर वितरण पर लगायी गयी रोक

भुगतान पर भी लगी रोक, गुणवत्ता को लेकर कृषि विभाग को मिली है शिकायत. भूमि संरक्षण निदेशालय ने आरोपों की जांच के लिए बनायी है तकनीकी समिति.

मनोज सिंह, रांची.

कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग का भूमि संरक्षण निदेशालय ने शिवा ट्रेडिंग कंपनी के पंपसेट और ट्रैक्टर वितरण पर रोक लगा दी है. कंपनी को होनेवाले भुगतान पर भी रोक लगा दी गयी है. कंपनी किसानों के बीच जो पंपसेट और ट्रैक्टर वितरण किया है, उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाये गये हैं. भूमि संरक्षण निदेशालय ने लगे आरोपों की जांच के लिए तकनीकी समिति बनायी है. समिति की रिपोर्ट के बाद विभाग आगे की कार्रवाई करेगा. कंपनी ग्रास रूट नायसिका-मॉडल एनके100, एनके 120पी, एनके 120ओएचवी, वीएसटी थ्रिलर ट्रैक्टर लिमिटेड का वीएसटी शक्ति 130डीआइ के खिलाफ आवेदन मिला है. इसकी विभागीय स्तर पर तकनीकी जांच करायी जा रही है. निदेशक स्तर से इसकी सूचना सभी जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी, सहायक निदेशक (सर्वे) हजारीबाग, भूमि संरक्षण पदाधिकारी तथा भूमि संरक्षण (सर्वे) पदाधिकारी को सूचना भेज दी गयी है. कई जिलों में इसका वितरण शुरू कर दिया गया था.

बीआइएस प्रमाण पत्र जरूरी

इस योजना के तहत पंपसेट और एचडीपीइ पाइप वितरण के लिए बीआइएस का प्रमाण पत्र जरूरी है. विभाग तकनीकी निर्धारण के लिए एक कमेटी बनाया था. तकनीकी निर्धारण के बाद कंपनियों को सूचीबद्ध किया गया है. सूचीबद्ध कंपनियों को ही जिलों में पंपसेट व एचडीपीइ पाइप वितरण के लिए अधिकृत किया गया है.

पिछले वित्तीय वर्ष का हो रहा है वितरण

इस योजना के तहत पिछले वित्तीय वर्ष (2024-25) का पंप सेट का वितरण किया रहा है. इसके लिए 20 करोड़ रुपये स्वीकृत किया गया है. योजना के तहत छोटे व सीमांत किसानों, स्वयं सहायता समूहों, महिला सखी मंडल, कृषक समूह, लैम्प्स-पैक्स को एक पंपसेट दिया जाना है. इस पर 90 फीसदी अनुदान है. 10 फीसदी राशि किसानों को लगाना है. इस योजना का क्रियान्वयन निदेशक भूमि संरक्षण की देखरेख में हो रहा है.

बोले अधिकारी

एक कंपनी ने शिवा ट्रेडिंग द्वारा आपूर्ति की जा रही पंपसेट व अन्य उपकरण की शिकायत की थी. विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है. फिलहाल कंपनी द्वारा किये जा रहे वितरण पर रोक लगा दी गयी है. भुगतान पर भी रोक है. एक तकनीकी समिति से जांच करायी जा रही है. जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे का निर्णय होगा.

अशोक सम्राट, निदेशक, भूमि संरक्षणB

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Published by: Rajiv kumar

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