रांची. सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की ओर से सोमवार को आड्रे हाउस में करम परब पूर्व संध्या संगोष्ठी सह सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक तरीके से संगोष्ठी से हुई. इसमें निदेशक संस्कृति आसिफ एकराम, पद्मश्री मुकुंद नायक, पद्मश्री महावीर नायक, पद्मश्री मधु मंसूरी, राकेश रमन और मानपूरन नायक ने करम पर्व की महत्ता पर विचार रखे.
इसके बाद नगाड़ा बजाकर अखरा जागरण कार्यक्रम किया गया. झारखंड के 12 जिलों से पहुंचे कलाकारों ने सामूहिक नृत्य की प्रस्तुति दी. अलग-अलग क्षेत्रों के कलाकारों ने करम पर्व से जुड़ी पारंपरिक नृत्य शैलियों के जरिए झारखंड की सांस्कृतिक विविधता को मंच पर उतारा.
संथाली से मुंडारी तक करम नृत्य की प्रस्तुति
जमशेदपुर की लक्ष्मी बेसरा के दल ने संथाली करम नृत्य प्रस्तुत किया. गुमला की रुना देवी और टीम ने नागपुरी करम नृत्य पेश किया. बुंडू के अनुरोध पातर ने मुंडारी करम नृत्य और रामगढ़ की रोहिल कुमारी ने खोरठा करम नृत्य की प्रस्तुति दी.
पूर्वी सिंहभूम की अंजलि टुडू और दल ने करम संथाली नृत्य प्रस्तुत किया. वहीं सरायकेला के भावतारण महतो, चंदनक्यारी की रेवती देवी और बेड़ो की मंगरो देवी ने करम नृत्य की प्रस्तुति दी. खूंटी के गुरु मुंडा ने मुंडारी करम नृत्य और कर्रा गोविंदपुर के जगदेव उरांव ने करम नृत्य प्रस्तुत किया.
अखरा में भी दिखी पारंपरिक रंगत
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने मंच के साथ अखरा में भी प्रस्तुति दी. करम पर्व से जुड़े पारंपरिक गीतों की गूंज दिनभर आड्रे हाउस में सुनाई देती रही. ‘कई भादो कर एकादशी करम गड़ाए रे...’, ‘करम करम कहले आयो...’ और ‘सातों रे बहिनी करम सेवा करे...’ जैसे करम गीतों पर कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया.
