रांची. मोरहाबादी स्थित रांची विश्वविद्यालय का दीक्षांत मंडप सोमवार को करम पूर्व संध्या समारोह में जनजातीय संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया. लाल पाड़ की साड़ी में युवतियां और सफेद गंजी-धोती में युवा मांदर, ढोल, नगाड़े और बांसुरी की धुन पर सामूहिक नृत्य करते दिखे. सरना नवयुवक संघ की ओर से आयोजित समारोह में 36 समूहों ने जनजातीय नृत्य और एकल गीतों की प्रस्तुति दी. कार्यक्रम में नेपाल और ओडिशा से भी प्रतिनिधि पहुंचे.
कार्यक्रम की शुरुआत कुड़ुख, मुंडारी और अन्य भाषाओं में प्रार्थना के साथ हुई. इसके बाद अलग-अलग जनजातीय समूहों ने पारंपरिक गीत और नृत्य प्रस्तुत किये.
संस्कृति से जोड़े रखने के लिए शुरू हुआ था आयोजन
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बंधु तिर्की ने कहा कि करम पूर्व संध्या समारोह का आयोजन पिछले 40 वर्षों से हो रहा है. इस दौरान सरना नवयुवक संघ के संस्थापकों ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. अब रांची के अलावा अन्य स्थानों पर भी इस तरह के आयोजन हो रहे हैं.
रांची विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू डॉ सुदेश कुमार साहू ने कहा कि जिस उल्लास के साथ आज करम मनाया जा रहा है, आने वाले समय में इसे इसी तरह मनाना संभव नहीं होगा. उन्होंने संस्कृति में हो रहे अतिक्रमण को इसकी वजह बताया.
संघ के अध्यक्ष डॉ हरि उरांव ने कहा कि शहर में रहने वाले आदिवासी समुदाय को अपनी संस्कृति से जोड़े रखने के उद्देश्य से करम पूर्व संध्या समारोह की शुरुआत की गयी थी. टीआरआइ के सेवानिवृत्त पदाधिकारी सोमा मुंडा ने भी समारोह को संबोधित किया.
मुंडारी, कुड़ुख और खड़िया गीतों पर थिरके लोग
समारोह में मुंडारी, कुड़ुख, खड़िया समेत अन्य भाषाओं में करम गीतों की प्रस्तुति हुई. मुंडारी नृत्य समूह ने 'आले हातु आकाड़ा जोजो सुबा जुम्बाड़ा...', कुड़ुख समूह ने 'एका टोंगरी ती करम बरचा...', 'रांची टोंगरी ती करम बरचा...' और 'टटखा मनन हरे कोवा...' जैसे गीतों पर नृत्य प्रस्तुत किया. खड़िया समूह ने 'रांची शहर ते गुलायची आलाय बलाय' गीत पर प्रस्तुति दी.
नेपाल से आये प्रतिनिधियों ने साझा किये अनुभव
नेपाल से आये परमेश्वर उरांव ने कहा कि वह पहली बार झारखंड आये हैं. उनके यहां करम का आयोजन इतने व्यापक स्तर पर नहीं होता है. वे यहां की संस्कृति को सीखने और समझने आये हैं. उन्होंने रांची आने के बाद महाराजा मदरा मुंडा के स्थान, मुडमा सहित अन्य स्थानों का दौरा करने की बात कही.
नेपाल के ही शिबू उरांव ने कहा कि वे भी पहली बार रांची आये हैं और नेपाल में अपनी भाषा व संस्कृति को बचाये रखने का प्रयास कर रहे हैं. ओडिशा से आये प्रतिनिधि अशोक कुजूर ने कहा कि ओडिशा में रहने वाले कई लोग झारखंड से ही गये हैं.
पहली बार बच्चों के लिए हुआ ट्राइबल थीम फैशन शो
इस बार समारोह में पहली बार बच्चों के लिए फैशन शो का आयोजन किया गया. बच्चों ने ट्राइबल थीम पर तैयार पारंपरिक परिधानों में रैंप वॉक किया. फैशन शो के आयोजन में एयर हॉस्टेस कांति गाड़ी का योगदान रहा.
'सरना फूल' के 49वें अंक का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान सरना नवयुवक संघ की पत्रिका 'सरना फूल' के 49वें अंक का विमोचन किया गया. इसके अलावा कृष्णा उरांव के कुड़ुख उपन्यास 'धसरका एड़पा' का भी विमोचन हुआ. मुंडारी साहित्य के लिए सोमा उरांव और पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान के लिए कुंदन चौधरी को सम्मानित किया गया.
