वेतन गांव के नाम, ड्यूटी शहर में: प्रतिनियुक्ति के खेल में गांव के स्कूल हुए शिक्षकविहीन

राज्य के विद्यालयों में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. आलम यह है कि शहरों के स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को गांव के स्कूलों के बजाय शहर में ही प्रतिनियुक्त किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी हो रही है.

सुनील कुमार झा, रांची

राज्य के विद्यालयों में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. कई मामलों में दूसरे जिले से शिक्षक को लाकर प्रतिनियुक्ति की जा रही है. इसके लिए विद्यालय में मूल पोस्टिंग वाले शिक्षक को हटाकर दूसरे विद्यालय में भेजा जा रहा है. यह प्रक्रिया निदेशालय से लेकर जिला शिक्षा कार्यालय स्तर तक से पूरे साल चलती रहती है. शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति को लेकर कोई स्पष्ट गाइडलाइन भी नहीं है.

मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय में भी ऐसी गड़बड़ी सामाने आ रही है. राज्य भर में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की जाती है. शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति के क्रम में इस बात का भी ध्यान नहीं रखा जाता कि जिस विद्यालय से शिक्षक को हटाया जा रहा है, वहां उस विषय की पढ़ाई कैसे होगी. शिक्षक को शहर के स्कूल में प्रतिनियुक्त कर दिया जाता है और गांव के स्कूल को बिना शिक्षक के छोड़ दिया जाता है.

प्रतिनियुक्ति में शिक्षक को अपने मूल विद्यालय से हटाकर बिना उनका नियमित स्थानांतरण किये दूसरे विद्यालय में भेजा जाता है. शिक्षक रिकॉर्ड में मूल विद्यालय में ही पदस्थापित होते हैं और उनका वेतन भी पूर्व के विद्यालय से दिया जाता है. उनकी उपस्थिति की जानकारी प्रतिनियुक्त विद्यालय से मूल विद्यालय को भेजी जाती है.

शहरी क्षेत्र में 30 तो गांवों में 60 पर एक शिक्षक

राज्य के हाइस्कूल व प्लस टू विद्यालयों में शहरी क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में शिक्षक पदस्थापित हैं. शहर के स्कूलों में सामान्यतः 30 से 35 बच्चों पर, तो ग्रामीण क्षेत्रों में 60 बच्चों पर एक शिक्षक हैं. हालांकि इन विद्यालयों में विषयवार शिक्षक की नियुक्ति का प्रवधान है.

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एक जिला से दूसरे जिला लाने के लिए मूल पदस्थापित शिक्षक को हटाया गया

  1. प्रतिनियुक्ति के बाद गांव के स्कूल बिना शिक्षक के, प्रतिनियुक्त समाप्त करने में भी गड़बड़ी

2. उत्कृष्ट विद्यालय से सीबीएसइ स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक को हटाया गया

  1. निदेशालय से लेकरजिला शिक्षा कार्यालय स्तर से हो रही है प्रतिनियुक्ति
  2. शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति को लेकर कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं, हो रही मनमानी

प्रतिनियुक्ति से रिक्त पद को दूसरी प्रतिनियुक्ति से भरा

केस स्टडी 01. एएसटीवीएस सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस रांची में प्लस टू स्तरपर गणित में पदस्थापित शिक्षक रामकृष्ण को हटाकर पीएम श्री प्लस टू विद्यालय सदमा में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया. वहीं लातेहार के एक विद्यालय से प्रतिनियुक्ति पर लाये गये शिक्षक को विद्यालय में रखा गया. जबकि रामकृष्ण का मूल पदस्थापन सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में हैं. उन्हें सीबीएसइ स्कूलों में वर्षों पढ़ाने का अनुभव है. सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में ऐसे शिक्षकों को प्राथमिकता देना है.

केस स्टडी 02. चान्हो : किसान प्लस टू उच्च विद्यालय में गणित और कॉमर्स के शिक्षक नहीं

किसान प्लस टू उच्च विद्यालय, चान्हो के गणित के शिक्षक को पहले प्रतिनियुक्ति पर जिला स्कूल में पदस्थापित किया गया. अब फिर जब जिला स्कूल से प्रतिनियुक्ति समाप्त की गयी, तो उन्हें कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नामकुम में प्रतिनियुक्त कर दिया गया. जबकि चान्हो के स्कूल में गणित के शिक्षक नहीं हैं. विद्यालय के कॉमर्सके शिक्षक भी दूसरे स्कूल में प्रतिनियुक्त हैं.

केस स्टडी 03. एक शिक्षक को शहर लाने के लिए दो और प्रतिनियुक्तियां

अपग्रेड प्लस टू विद्यालय हेरहंज, लातेहार के गणित के शिक्षक की प्रतिनियुक्ति रांची के एएसटीवीएस सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में की गयी है. वहीं प्लस टू विद्यालय हेरहंज में प्रोजेक्ट प्लस टू हाइस्कूल छिपादोहर लातेहार के शिक्षक की प्रतिनियुक्ति की गयी. ऐसे में एक शिक्षक को शहर के विद्यालय में प्रतिनियुक्त करने के लिए दो शिक्षकों को अपने मूल विद्यालय से हटाया गया. फिलहाल प्रोजेक्ट प्लस टू हाइस्कूल छिपादोहर में प्लस टू स्तरपर गणित के शिक्षक नहीं है.

केस स्टडी 04. सोनाहातू स्कूल के कैमिस्ट्री शिक्षक शहर में प्रतिनियुक्त : राजकीयकृत प्लस टू हाइस्कूल सोनाहातू के कैमिस्ट्री विषय के शिक्षक की प्रतिनियुक्ति पहले जिला स्कूल में की गयी. अव फिर जव जिला स्कूल से प्रतिनियुक्ति समाप्त की गयी, तो उन्हें टीवीएस जगन्नाथपुर में प्रतिनियुक्त किया गया. जबकि मूल विद्यालय में रसायन विषय का कोई शिक्षक नहीं है. स्कूल के माध्यमिक स्तर के गणित और भौतिकी के शिक्षक भी शहर में प्रतिनयुक्त है.

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