रांची. राजधानी का सीएम एक्सीलेंस स्कूल किसी बड़े हादसे की चेतावनी बन चुका है. हर दिन छत से झड़ते प्लास्टर के बीच मासूम बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं. हालात इतने भयावह हैं कि क्लास में प्रवेश ही बच्चों की नजर सबसे पहले जमीन पर गिरे मलबे पर जाती है. पिछले दो महीने से जीर्णोद्धार का मामला फाइलों में उलझा पड़ा है. जिला शिक्षा विभाग ने करीब 78 लाख रुपये का प्राक्कलन बनाकर जिला को भेजा, जिसमें चार कमरे और पूरे बरामदे की मरम्मत शामिल हैं. लेकिन डीसी ने अब इसे जांच के लिए जिला अभियंता को भेज दिया है. प्राक्कलन का आकलन करने को कहा है. जिस वजह से जीर्णोद्धार का काम शुरू नहीं हो सका. प्रभात खबर ने विगत 27 जुलाई को सीएम एक्सीलेंस स्कूल की जर्जर की कहानी प्रमुखता से प्रकाशित की थी. खबर छपने के बाद डीसी ने जांच के आदेश भी दिये. कई चरण में पदाधिकारियों ने स्कूल का निरीक्षण भी किया. पर अब तक कुछ नहीं हुआ.
निरीक्षण हुआ, लेकिन कार्रवाई गायब
भवन निर्माण विभाग के अधिकारी हालात देखने जरूर पहुंचे, लेकिन निरीक्षण के बाद मानो चैन की नींद सो गए. दूसरी ओर, डीईओ विनय कुमार ने करीब 78 लाख रुपये का प्रस्ताव जिला कार्यालय को भेजा था. लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी फाइल ठंडे बस्ते में पड़ी है.हर सुबह कक्षा में आते ही जमीन पर गिरे रहते प्लास्टर
बच्चों से पूछने पर पता चला कि हर सुबह कक्षा में आते ही जमीन पर गिरे हुए प्लास्टर दिखाई देते हैं. बारिश के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है. न केवल पुराना भवन बल्कि नया भवन भी पानी रिसने की समस्या से जूझ रहा है. बारिश के दौरान छत से टपकता पानी बच्चों और शिक्षकों दोनों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
