धर्म का बाहरी आडंबर से कोई संबंध नहीं : आचार्य विश्वोदगतानंद

आनंद मार्ग का तीन दिवसीय धर्म महासम्मेलन शुरू, रिनेसां यूनिवर्सल की गोष्ठी

प्रतिनिधि, रातू.

आनंद मार्ग का तीन दिवसीय धर्म महासम्मेलन का शुभारंभ रातू स्थित दुल्हन बैंक्विट हॉल में शुक्रवार को किया गया. इसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों और विदेशों से आये साधकों ने भजन कीर्तन और आध्यात्मिक साधना की. आचार्य ज्योतिप्रकशानंद अवधूत ने सभी को योगासन सिखाया. दोपहर में श्री श्री आनंदमूर्ति के प्रवचन का वीडियो क्लिप दिखाया गया. जिसमें उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति के सिद्धांत को समझाया. कहा कि प्रारंभ में परमात्मा अकेले थे. एकाकीपन से ऊब कर उन्होंने सृष्टि की रचना की. अब वे अपनी लीला के माध्यम से सभी को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं. कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में दोपहर तीन बजे रिनेसां यूनिवर्सल की ”धर्म और उसकी सामाजिक अनिवार्यता” विषय पर विचार गोष्ठी हुई. गोष्टी की शुरुआत श्री श्री आनंदमूर्ति के फोटो पर माल्यार्पण एवं दीप जला कर किया गया. क्रोएशिया (यूरोप) से आये आचार्य विश्वोदगतानंद अवधूत ने धर्म को परिभाषित किया. कहा कि धर्म का बाहरी आडंबर से कोई संबंध नहीं है. धर्म का अर्थ है मन मंदिर में छुप कर बैठे हुए परमात्मा से साक्षात्कार करना और समाज की सेवा करना है. यदि समाज दुराचार में डूबा रहा तो हमारी साधना का कोई मूल्य नहीं है. डॉ आदित्य मोहंती ने कहा कि इस सृष्टि का आरंभ और अंत धर्म ही है. धर्म के बिना जो कुछ भी है, सब व्यर्थ है. धर्म ही मानवता का आधार है. यदि धर्म की अवहेलना की गयी तो मानव समाज पशुओं का झुंड बन कर रह जायेगा. प्रदीप शर्मा ने कहा कि महाभारत के अमृत के रूप में हमें गीता मिली और गीता में धर्म शब्द का उपयोग कई बार किया गया है. गीता की शुरुआत ही ”धर्म क्षेत्रे कुरु क्षेत्रे” से होती है. इस तथ्य को याद करते समय हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि दुनिया के 10 प्रतिशत लोग नास्तिक हैं और वे लोग धार्मिक लोगों से ज़्यादा मानवीय हैं. इतिहास साक्षी है जो लोग धर्म के पथ पर चले, उन्होंने ही समाज को नयी दिशा प्रदान किया है. महासम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए आचार्य परमेश्वरानंद अवधूत ने सभी वक्ताओं की सराहना की. कहा कि सन 1958 में श्री श्री आनंदमूर्ति ने रिनेसां यूनिवर्सल का प्रारंभकरते समय जनजागरण के माध्यम से जिस क्रान्तिकारी परिवर्तन का संकल्प लिया था, अब समय आ गया है कि हम उनके संदेश को जन जन तक पहुंचाने के लिये समाज के प्रबुद्ध जनों के बीच इसी रिनेसां यूनिवर्सल की बैठकें करते रहे. संचालन आचार्य दयाशिखरानंद अवधूत ने किया. महासम्मेलन में दूर दराज के आनंद मार्गी मौजूद थे.

आनंद मार्ग का तीन दिवसीय धर्म महासम्मेलन शुरू, रिनेसां यूनिवर्सल की गोष्ठी

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