बीट क्षेत्र का निवासी नहीं होने पर नौकरी से इनकार गलत, झारखंड हाईकोर्ट ने नियुक्ति पर दिया बड़ा आदेश

झारखंड हाईकोर्ट ने गोड्डा जिले में चौकीदार भर्ती पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल बीट क्षेत्र का स्थायी निवासी न होने के आधार पर किसी योग्य अभ्यर्थी को नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता. यह फैसला भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं के लिए भी मार्गदर्शक होगा.


रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने गोड्डा जिले में चौकीदार भर्ती (विज्ञापन संख्या 01/2024) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल संबंधित बीट क्षेत्र का स्थायी निवासी नहीं होने के आधार पर किसी योग्य अभ्यर्थी की नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता. अदालत ने राज्य सरकार और गोड्डा जिला प्रशासन को प्रार्थियों के मामलों पर दोबारा विचार कर नियमानुसार नियुक्ति देने का निर्देश दिया है.

सरकार और जिला प्रशासन को दिया पुनर्विचार का निर्देश

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि याचिकाकर्ता सभी आवश्यक पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं और उनके खिलाफ कोई अन्य कानूनी बाधा नहीं है, तो उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किया जाए. अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों के साथ केवल निवास के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता. अदालत ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं के मामलों की नए सिरे से जांच करें और कानून तथा नियमावली के अनुरूप उचित निर्णय लें.

बीट का निवासी होना अनिवार्य नहीं

सुनवाई के दौरान अदालत ने झारखंड चौकीदार कैडर नियमावली-2015 और भर्ती विज्ञापन की शर्तों का विस्तृत परीक्षण किया. अदालत ने कहा कि नियमावली में कहीं भी यह अनिवार्य नहीं किया गया है कि अभ्यर्थी उसी बीट क्षेत्र का स्थायी निवासी हो, जहां रिक्ति निकली है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित बीट में योग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं है, तो पड़ोसी बीट के पात्र अभ्यर्थी को भी नियुक्त किया जा सकता है. इसलिए केवल इस आधार पर उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करना कि वे संबंधित बीट के निवासी नहीं हैं, नियमों के अनुरूप नहीं है.

स्थायी निवास के आधार पर भेदभाव उचित नहीं

अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि स्थायी निवास को आधार बनाकर इस प्रकार का आरक्षण या भेदभाव कानून की भावना के विपरीत है. सरकारी नियुक्तियों में सभी पात्र अभ्यर्थियों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए. अदालत ने माना कि यदि भर्ती नियमों में ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं है, तो प्रशासन अपनी ओर से अतिरिक्त शर्त लागू नहीं कर सकता. इसलिए केवल स्थानीय बीट का निवासी नहीं होने के कारण नियुक्ति से वंचित करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता.

क्या था पूरा मामला

मामला गोड्डा जिले में विज्ञापन संख्या 01/2024 के तहत चौकीदार के 276 पदों पर भर्ती से जुड़ा है. याचिकाकर्ता विशाल हेंब्रम एवं अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उन्होंने लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा सफलतापूर्वक पास की थी. इसके बावजूद अंतिम परिणाम में केवल 109 पदों का ही परिणाम प्रकाशित किया गया, जबकि शेष पद रिक्त छोड़ दिए गए. याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि उनसे कम अंक प्राप्त करने वाले कुछ अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया, जबकि उन्हें केवल इस आधार पर नियुक्ति नहीं दी गई कि वे संबंधित बीट क्षेत्र के स्थायी निवासी नहीं थे.

याचिकाकर्ताओं की ओर से रखा गया पक्ष

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने अदालत में पक्ष रखा. उन्होंने दलील दी कि भर्ती नियमों में संबंधित बीट का स्थायी निवासी होना अनिवार्य नहीं है. ऐसे में प्रशासन द्वारा उम्मीदवारों को इस आधार पर नियुक्ति से वंचित करना नियमों और समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ है. दलीलों और उपलब्ध अभिलेखों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए मामले का निष्पादन कर दिया.

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भर्ती प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण फैसला

हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल गोड्डा चौकीदार भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस आदेश से यह स्पष्ट संदेश गया है कि भर्ती नियमों से इतर अतिरिक्त शर्तें लागू कर पात्र अभ्यर्थियों को अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता. सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता, समान अवसर और विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.

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Published by: Kumarvishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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