राजधानी की बहुप्रतीक्षित रांची शहरी जलापूर्ति योजना एक बार फिर प्रशासनिक अड़चन में फंस गयी है. तिलता चौक से पिस्का मोड़ तक 10.8 किलोमीटर लंबी राइजिंग पाइपलाइन बिछाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देने पर सहमति तो दे दी है, लेकिन इसके बदले 32 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त रखी है. इस पर राज्य सरकार ने एनएचएआइ को पत्र लिखकर राशि माफ करने का आग्रह किया है.
सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह जनहित से जुड़ी पेयजल योजना है और इस पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डाला जाना चाहिए. करीब 1100 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत रांची में 450 किमी से अधिक वितरण पाइपलाइन बिछायी जा चुकी है. साथ ही 10 से अधिक जलमीनारों का निर्माण भी पूरा हो चुका है. लेकिन करीब 10.8 किमी के हिस्से में राइजिंग पाइपलाइन नहीं बिछाये बनने के कारण रुक्का डैम का पानी अब तक जलमीनारों तक नहीं पहुंच पाया है. इसके चलते शहर में जलापूर्ति योजना शुरू नहीं हो सकी है.
रांची शहरी जलापूर्ति योजना
- तिलता चौक से पिरका मोड़ तक बछानी है 10.8 किमी लंबी राइजिंग पाइपलाइन
- पाइपलाइन बिछाने का एनओसी देने के लिए एनएचएआइ ने मांगे है ₹32 करोड़
- राज्य सरकार ने कहा-जनहित की योजना, अतिरिक्त बोझ न डाले एनएचएआइ
सात सालों से फंसा हुआ था मामला
तिलता से पिस्का मोड़ तक राइजिंग पाइपलाइन बिछाये जाने को लेकर जुडको द्वारा वर्ष 2019 से एनएचएआइ से एनओसी की मांग की जा रही थी. इस दौरान 11 बार पत्राचार और कई संयुक्त बैठकें हुईं, लेकिन अनुमति नहीं मिली. अब सात वर्ष बाद एनओसी पर सहमति बनी है, लेकिन 32 करोड़ रुपये की शर्त परियोजना के सामने नई चुनौती बन गयी है.
पाइपलाइन बिछी, तो शहर को होगा फायदा
तिलता चौक से पिस्का मोड़ तक राइजिंग पाइपलाइन का काम पूरा हो जाता है, तो रुक्का डैम से जलापूर्ति शुरू हो जायेगी. इससे रांची के करीब 1.50 लाख घरों के पांच लाख से अधिक लोगों को नियमित शुद्ध पेयजल मिलेगा और गर्मी में पानी की किल्लत तथा टैंकरों पर निर्भरता से भी राहत मिलने की उम्मीद है.
छह साल, 11 चिट्ठियां और नतीजा शून्य
- 2019: जुडको ने एनएचएआइ से एनओसी के लिए पहला पत्राचार किया
- 2019-2025 : 11 बार चिट्ठियां भेजी गयीं, कई संयुक्त बैठकें हुईं
- 2026 (अब): छह साल बाद एनएचएआइ ने एनओसी पर सहमति दी, लेकिन 32 करोड़ रुपये की शर्त थमा दी
