रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने नामकुम अंचल में प्रार्थी की जमीन से जुड़े राजस्व दस्तावेज (म्यूटेशन रिकॉर्ड) गायब होने के मामले में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे निष्पादित (ड्रॉप) कर दिया है. जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर जानकारी दी गई कि हाईकोर्ट के पिछले आदेश के अनुसार मामले में नियमित प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है.
तत्कालीन सीओ श्वेता वर्मा समेत तीन पर गिरी गाज
एसीबी द्वारा दर्ज एफआईआर में नामकुम अंचल की तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) श्वेता वर्मा, अंचल निरीक्षक (सीआई) मनोज कुमार और लिपिक दीपक कुमार को नामजद आरोपी बनाया गया है. एसीबी के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुमित गाड़ोदिया ने अदालत को बताया कि कैबिनेट सेक्रेटरी से अनुमति मिलने के बाद इस मामले में प्रारंभिक जांच (PE) की गई थी. जांच में प्रथम दृष्टया अंचल अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से दस्तावेजों की हेराफेरी और गायब करने की बात सही पाई गई, जिसके बाद प्राथमिक दर्ज की गई है. एसीबी के इस जवाब पर संतोष जताते हुए अदालत ने अवमानना याचिका को बंद कर दिया.
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क्या था पूरा विवाद?
उल्लेखनीय है कि प्रार्थी थॉमस साइमन सायरिल हंस ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी. प्रार्थी का आरोप था कि एकल पीठ ने नामकुम अंचल स्थित उनकी जमीन के म्यूटेशन दस्तावेज की सर्टिफाइड कॉपी (प्रमाणित प्रति) देने का स्पष्ट आदेश दिया था. इसके बावजूद अंचल कार्यालय द्वारा मूल राजस्व अभिलेख उपलब्ध कराने के बजाय रिकॉर्ड गायब होने का हवाला देकर मामला लटकाया जा रहा था.
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