रांची: HEC बस्ती में अदालती आदेश से राहत के बाद पुनर्वास की मांग तेज, 28 सितंबर को सचिवालय मार्च

रांची की HEC बस्ती में अतिक्रमण हटाओ अभियान के बीच हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद बस्ती बचाओ संघर्ष समिति ने पुनर्वास की मांग तेज कर दी है. 28 सितंबर को मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी आवाज उठाने की तैयारी है.


रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) क्षेत्र की बस्तियों पर चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के बीच हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद बस्ती बचाओ संघर्ष समिति ने पुनर्वास की मांग तेज कर दी है. समिति के संयोजक मिंटू पासवान ने कहा कि अदालत ने फिलहाल 31 दिसंबर तक राहत दी है, लेकिन इसके बाद लोगों को हटाने का सवाल बना हुआ है. वहीं वार्ड 41 की पार्षद नीलम चौधरी ने दावा किया कि गरीबों को पहले बसाया जाए, उसके बाद ही हटाने की कार्रवाई होनी चाहिए.

राहत मिली लेकिन खतरा टला नहीं: मिंटू पासवान

मिंटू पासवान ने कहा, "कोर्ट ने 31 दिसंबर तक स्टे दिया है, लेकिन आदेश में यह भी कहा गया है कि इससे पहले अतिक्रमण स्वतः हटा लिया जाए. इसलिए लोगों को राहत तो मिली है, लेकिन तलवार अभी भी सिर पर लटकी हुई है." उन्होंने कहा कि समिति वर्ष 2005 से आंदोलन कर रही है और उसकी मुख्य मांग पुनर्वास की है. उनके मुताबिक दिल्ली में 1700 से अधिक बस्तियों को नियमित कर मालिकाना हक दिया गया था, इसलिए यहां भी बसाने की योजना बनाई जानी चाहिए.


"फैसला आया, फिर भी बुलडोजर नहीं रुका"

मिंटू पासवान ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट का फैसला सुबह 11:30 बजे आया था और उसी समय बुलडोजर कार्रवाई रोकने की बात कही गई थी, लेकिन कार्रवाई तुरंत नहीं रुकी. उन्होंने कहा, "ये लोग नए नहीं हैं. सात पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं. इनके दादा-परदादा भी यहीं रहते थे." उन्होंने बताया कि दो अधिवक्ताओं, इंद्रजीत सिन्हा और अखौरी शेन ने बिना फीस लिए हाईकोर्ट में पक्ष रखा, जिसके लिए समिति ने उनका आभार जताया.

28 सितंबर को मुख्यमंत्री से मिलने की घोषणा

मिंटू पासवान ने कहा कि समिति 28 सितंबर को भगत सिंह जयंती के अवसर पर सचिवालय जाकर मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगी. उन्होंने कहा कि HEC क्षेत्र में बड़ी संख्या में गरीब और आदिवासी परिवार रहते हैं, इसलिए सरकार पुनर्वास की योजना लाए, नहीं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.

पार्षद नीलम चौधरी ने दिखाए PMAY के दस्तावेज

वार्ड 41 की पार्षद नीलम चौधरी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बस्ती के लोगों को पहले चिन्हित किया गया था. उन्होंने मीडिया के सामने रसीदें और दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि कई लोगों ने योजना के तहत 5,000 रुपये भी जमा किए थे. उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में लगभग 3000 लाभुक चिन्हित हुए थे, जिनमें 450 लोगों ने राशि जमा की थी, लेकिन दस साल बाद भी आवास नहीं बन सका.

पहले बसाइए, फिर हटाइए: पार्षद नीलम चौधरी

नीलम चौधरी ने कहा, "हमारी एक ही मांग है कि पहले एक-एक परिवार का पुनर्वास किया जाए, उसके बाद हटाने की कार्रवाई हो." उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया और नौ घंटे तक जेल में रखा गया, लेकिन गरीबों के साथ खड़े रहने से पीछे नहीं हटेंगी.

इसे भी पढ़ें: झारखंड हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, CCL के मृत कर्मचारी की बहन को 6 सप्ताह में नौकरी देने का आदेश

राहत के बाद भी बना हुआ है सबसे बड़ा सवाल

बस्ती के कई निवासियों ने कहा कि फिलहाल उनका घर बच गया है, लेकिन दिसंबर के बाद क्या होगा, इसकी चिंता बनी हुई है. बस्ती बचाओ संघर्ष समिति का कहना है कि हाईकोर्ट के स्टे से तत्काल राहत जरूर मिली है, लेकिन यदि पुनर्वास की ठोस योजना नहीं बनी तो 31 दिसंबर के बाद फिर वही सवाल सामने होगा कि लोग अपने परिवार के साथ आखिर कहां जाएंगे.

इसे भी पढ़ें: रांची HEC अतिक्रमण अभियान तीसरे दिन रुका, हाईकोर्ट के आदेश के बाद लौटा बुलडोजर

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >