रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) क्षेत्र की बस्तियों पर चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के बीच हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद बस्ती बचाओ संघर्ष समिति ने पुनर्वास की मांग तेज कर दी है. समिति के संयोजक मिंटू पासवान ने कहा कि अदालत ने फिलहाल 31 दिसंबर तक राहत दी है, लेकिन इसके बाद लोगों को हटाने का सवाल बना हुआ है. वहीं वार्ड 41 की पार्षद नीलम चौधरी ने दावा किया कि गरीबों को पहले बसाया जाए, उसके बाद ही हटाने की कार्रवाई होनी चाहिए.
राहत मिली लेकिन खतरा टला नहीं: मिंटू पासवान
मिंटू पासवान ने कहा, "कोर्ट ने 31 दिसंबर तक स्टे दिया है, लेकिन आदेश में यह भी कहा गया है कि इससे पहले अतिक्रमण स्वतः हटा लिया जाए. इसलिए लोगों को राहत तो मिली है, लेकिन तलवार अभी भी सिर पर लटकी हुई है." उन्होंने कहा कि समिति वर्ष 2005 से आंदोलन कर रही है और उसकी मुख्य मांग पुनर्वास की है. उनके मुताबिक दिल्ली में 1700 से अधिक बस्तियों को नियमित कर मालिकाना हक दिया गया था, इसलिए यहां भी बसाने की योजना बनाई जानी चाहिए.
"फैसला आया, फिर भी बुलडोजर नहीं रुका"
मिंटू पासवान ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट का फैसला सुबह 11:30 बजे आया था और उसी समय बुलडोजर कार्रवाई रोकने की बात कही गई थी, लेकिन कार्रवाई तुरंत नहीं रुकी. उन्होंने कहा, "ये लोग नए नहीं हैं. सात पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं. इनके दादा-परदादा भी यहीं रहते थे." उन्होंने बताया कि दो अधिवक्ताओं, इंद्रजीत सिन्हा और अखौरी शेन ने बिना फीस लिए हाईकोर्ट में पक्ष रखा, जिसके लिए समिति ने उनका आभार जताया.
28 सितंबर को मुख्यमंत्री से मिलने की घोषणा
मिंटू पासवान ने कहा कि समिति 28 सितंबर को भगत सिंह जयंती के अवसर पर सचिवालय जाकर मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगी. उन्होंने कहा कि HEC क्षेत्र में बड़ी संख्या में गरीब और आदिवासी परिवार रहते हैं, इसलिए सरकार पुनर्वास की योजना लाए, नहीं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.
पार्षद नीलम चौधरी ने दिखाए PMAY के दस्तावेज
वार्ड 41 की पार्षद नीलम चौधरी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बस्ती के लोगों को पहले चिन्हित किया गया था. उन्होंने मीडिया के सामने रसीदें और दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि कई लोगों ने योजना के तहत 5,000 रुपये भी जमा किए थे. उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में लगभग 3000 लाभुक चिन्हित हुए थे, जिनमें 450 लोगों ने राशि जमा की थी, लेकिन दस साल बाद भी आवास नहीं बन सका.
पहले बसाइए, फिर हटाइए: पार्षद नीलम चौधरी
नीलम चौधरी ने कहा, "हमारी एक ही मांग है कि पहले एक-एक परिवार का पुनर्वास किया जाए, उसके बाद हटाने की कार्रवाई हो." उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया और नौ घंटे तक जेल में रखा गया, लेकिन गरीबों के साथ खड़े रहने से पीछे नहीं हटेंगी.
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राहत के बाद भी बना हुआ है सबसे बड़ा सवाल
बस्ती के कई निवासियों ने कहा कि फिलहाल उनका घर बच गया है, लेकिन दिसंबर के बाद क्या होगा, इसकी चिंता बनी हुई है. बस्ती बचाओ संघर्ष समिति का कहना है कि हाईकोर्ट के स्टे से तत्काल राहत जरूर मिली है, लेकिन यदि पुनर्वास की ठोस योजना नहीं बनी तो 31 दिसंबर के बाद फिर वही सवाल सामने होगा कि लोग अपने परिवार के साथ आखिर कहां जाएंगे.
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