रजनीकांत आध्यात्मिक तीर्थयात्रा के लिए रांची के योगदा आश्रम पहुंचे, गुरु परमहंस योगानंद में है अटूट आस्था

रजनीकांत ने आज सुबह योगदा आश्रम का दौरा किया और वहां वे ध्यान केंद्र में एक घंटे तक ध्यानरत रहे. रजनीकांत परमहंस योगानंद के शिष्य हैं और रांची आने से पहले वे उत्तराखंड के द्वारहाट आश्रम भी गये. यहां उन्होंने महावतार बाबाजी की गुफा में भी समय बिताया.

भारतीय सिनेमा के महान कलाकार और दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपर स्टार रजनीकांत रांची दौरे पर हैं. वे अपनी आध्यात्मिक साधना के क्रम में रांची स्थित योगदा आश्रम पहुंचे हैं. योगदा आश्रम से जुड़े स्वामी एकत्वानंद जी ने बताया कि वे अपनी आध्यात्मिक तीर्थयात्रा के क्रम में योगदा आश्रम आये हुए हैं. आज सुबह रांची स्थित आश्रम में उन्होंने योगानंदजी के कमरे में लगभाग एक घंटा ध्यान किया. इस ध्यान के दौरान उन्हें अद्वितीय शांति और दिव्यता की अनुभूति हुई. ध्यान के बाद उन्होंने योगदा आश्रम के वरिष्ठ संन्यासियों के साथ मुलाकात और आध्यात्मिक परामर्श किया.

ध्यान केंद्र में एक घंटे तक ध्यानरत रहे

रजनीकांत ने आज सुबह योगदा आश्रम का दौरा किया और वहां वे ध्यान केंद्र में एक घंटे तक ध्यानरत रहे. रजनीकांत परमहंस योगानंद के शिष्य हैं और रांची आने से पहले वे उत्तराखंड के द्वारहाट आश्रम भी गये. यहां उन्होंने महावतार बाबाजी की गुफा में भी समय बिताया. रांची में परमहंस योगानंद के ध्यानकेंद्र में ध्यान के दौरान रजनीकांत ने काफी सकारात्मकता का अनुभव किया. स्वामी एकत्वानंद जी ने बताया कि रजनीकांत ने ध्यान के बाद बताया कि उन्हें एेसा प्रतीत हुआ कि कई सकारात्मक ऊर्जा उनके साथ थी और गुरुजी का आशीर्वाद भी उन्हें प्राप्त हुआ. रजनीकांत रांची के योगदा आश्रम में दूसरी बार आये हैं. इसके पहले वे शंकराचार्य के साथ रांची आश्रम आये थे.

रजनीकांत काफी लंबे समय से योगदा आश्रम से जुड़े हैं

योगदा आश्रम के स्वामी एकत्वानंद जी ने बताया कि रजनीकांत काफी लंबे समय से योगदा आश्रम से जुड़े हैं. वे योगदा आश्रम के अंतरराष्ट्रीय केंद्र जो अमेरिका के लॉस एंजिल्स में स्थित है वे वहां भी जा चुके हैं. उनकी परमहंस योगानंद में अपार श्रद्धा है. ध्यान के बाद वे अपने प्रशसंकों से बहुत ही सहजता के साथ मिले और तस्वीरें भी खिंचवाया. रजनीकांत ने अपने किसी भी फैन को निराश नहीं किया. योगदा आश्रम में कुछ घंटे बिताने के बाद वे रजरप्पा मंदिर चले गये और वहां जाकर छिन्नमस्तिका मां की पूजा की.

राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की

ज्ञात हो कि रजनीकांत बुधवार को ही रांची पहुंचे हैं और शुक्रवार को यहां से रवाना होंगे. बुधवार रात को उन्होंने झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की. हाल ही में उनकी मूवी जेलर रिलीज हुई है जिसको लेकर रजनीकांत चर्चा में हैं. यह मूवी हिंदी, तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम में रिलीज हुई है. रजनीकांत पद्मविभूषण से सम्मानित अभिनेता हैं.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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