रांची. प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की पूर्व अंतराष्ट्रीय प्रमुख प्रशासिका दादी जानकी की पुण्यतिथि गुरुवार को स्थानीय सेवा केंद्र चौधरी बगान हरमू रोड में मनायी गयी. पुण्यतिथि को वैश्विक आध्यात्मिक जागृति दिवस के रूप में मनाया गया. इस अवसर पर सेल से सेवानिवृत डीजीएम शिव शंकर ने कहा कि लाखों लोगों के जीवन में उजियारा कर अविश्वसनीय व्यक्तित्व की धनी 104 वर्षीय राजयोगिनी दादी डॉ जानकी आसमान का सबसे चमकता सितारा बन गयीं. वे योग की शक्ति की मिसाल थीं. अधिवक्ता अशोक कुमार ने कहा कि जिस उम्र में लोग खुद को कार्यों से सेवानिवृत्त समझ लेते हैं उस उम्र में दादी डॉ जानकी पहली बार विदेश गयीं. पूरी दुनिया में उनका मकसद था आध्यात्मिकता का बीज बोना.
दादी जानकी का पूरा जीवन समाज सेवा में समर्पित रहा
निर्मला बहन ने कहा कि राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी दादी का 104 वर्ष की उम्र में देहावसान हुआ. दादी जानकी का पूरा जीवन समाज सेवा में समर्पित रहा है. उन्होंने अकेले ही सौ देशों में ईश्वरीय पैगाम दिया था. इस अवसर पर दादी जी की स्मृति में सभी को भोग दिया गया. सदा मधुरता, सरलता, परोपकारिता, सहानुभूति, विश्व कल्याणी, वरदानी और विश्व परिवर्तन की सेवा का दृढ़ता से व्रत लिया गया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
