रांची : झारखंड में चर्चित शराब घोटाले के बाद अब आय से अधिक संपत्ति के मामले में, निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को ‘डिफॉल्ट बेल’ मिल गई है. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा निर्धारित समय सीमा (60 दिन) के भीतर आरोप पत्र दाखिल नहीं कर पाने की वजह से, कोर्ट ने उन्हें यह तकनीकी राहत दी है. हालांकि, इस जमानत के बावजूद उन्हें फिलहाल जेल से रिहाई नहीं मिलेगी, क्योंकि वे हजारीबाग जमीन घोटाले जैसे अन्य गंभीर मामलों में भी आरोपी हैं.
जमीन घोटाले के कारण तत्काल लाभ नहीं
विनय चौबे का नाम हजारीबाग के बहुचर्चित जमीन घोटाला मामले में भी शामिल है, जिसमें उनके खिलाफ पहले ही आरोप पत्र दायर किया जा चुका है. न्यायालय में यह मामला अभी लंबित है, जिसके कारण आय से अधिक संपत्ति मामले में मिली इस जमानत का उन्हें तत्काल कोई व्यावहारिक लाभ नहीं मिल पाएगा. इसी मामले में उनके सहयोगी और दिल्ली के रियल एस्टेट कारोबारी सरदार सुरेंद्र सिंह को भी डिफ़ॉल्ट बेल मिलने की संभावना बढ़ गई है.
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बाबूलाल मरांडी ने उठाए गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष, बाबूलाल मरांडी, ने राज्य सरकार और एसीबी की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि, जांच एजेंसी द्वारा समय पर चार्जशीट दाखिल न करना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है. मरांडी ने सवाल उठाया कि, जब पर्याप्त सबूत और गवाह मौजूद थे, तो चार्जशीट में देरी क्यों हुई? इस मामले ने अब झारखंड की राजनीति में एक नया विवाद छेड़ दिया है.
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