Prabhat Khabar @41: सामाजिक सरोकार की पत्रकारिता का सफर

Prabhat Khabar@41: प्रभात खबर 41 साल का सफर पूरा कर रहा है. 14 अगस्त 1984 को रांची से प्रभात खबर का प्रकाशन शुरू हुआ था. इसके बाद धीरे-धीरे इसका विस्तार 3 राज्यों (झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल) में हुआ. प्रभात खबर की वेबसाइट prabhatkhabar.com ने भी देश में अपनी अलग पहचान बनायी है. प्रभात खबर के स्थापना दिवस पर पढ़ें प्रधान संपादक आशुतोष चतुर्वेदी का विशेष संपादकीय ‘सामाजिक सरोकार की पत्रकारिता का सफर’.

Prabhat Khabar @41: जोहार. प्रभात खबर के रांची संस्करण ने अपनी यात्रा का एक और पड़ाव पूरा कर लिया है. आप सभी के स्नेह और विश्वास के बल पर आज अपनी स्थापना के 41 वर्ष पूरे कर रहा है. प्रभात खबर के आगे बढ़ने का श्रेय सिर्फ और सिर्फ पाठकों को जाता है, जिन्होंने प्रभात खबर के प्रति अपना स्नेह बनाए रखा है. हमें गर्व है कि झारखंड की माटी-पानी का यह अखबार तीन-तीन राष्ट्रीय अखबारों की चुनौती के बावजूद निरंतर आगे बढ़ता जा रहा है.

झारखंड के लोगों ने प्रभात खबर की जन सरोकार की पत्रकारिता को न सिर्फ सराहा, बल्कि भरपूर सहयोग भी दिया. प्रभात खबर ने हमेशा सामाजिक सरोकार को केंद्र में रखा और पाठकों का भरोसा जीतने की कोशिश की है. कंटेंट के स्तर पर एक नयी किस्म की पत्रकारिता का प्रयास किया है.

प्रभात खबर ने झारखंड की बेहतरी और बेहतर समाज निर्माण की दिशा में एक अखबार के रूप में अपनी जिम्मेवारियों का भरसक निर्वहन किया है, इसीलिए प्रभात खबर लगातार जनता के दुख-सुख से जुड़े सवाल उठाता रहा है. पिछले कुछ वर्षों में जीवन के हर क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुए हैं. हमने अपने पत्रकारीय धर्म के तहत बताने की कोशिश की कि कैसे दुनिया बदल रही है. ज्ञान और नयी तकनीक जिस समाज के पास होंगे, वह समाज आगे बढ़ेगा.

जहां तक सूचना तकनीक का प्रश्न है, बीते एक दशक में इससे शायद ही कोई अछूता रहा हो. अनियंत्रित सूचनाओं का भारी प्रवाह है. न्यू मीडिया के क्षेत्र में भी हमारी वेबसाइट प्रभात खबर डॉट कॉम और एफएम रेडियो धूम की दमदार उपस्थिति है. आपसे अनुरोध है कि प्रभात खबर पढ़ने के साथ-साथ प्रभात खबर के डिजिटल प्लेटफॉर्म prabhatkhabar.com पर भी जायें और वहां से प्रामाणिक सूचनाएं प्राप्त करें.

स्थापना दिवस के अवसर पर हम प्रभात खबर के सुधि पाठकों, विज्ञापनदाताओं और अखबार के वितरक बंधुओं के प्रति भी आभार व्यक्त करते हैं. यात्रा के इस पड़ाव तक प्रभात खबर के विभिन्न विभागों के सहयोगियों के बगैर पहुंच पाना मुमकिन नहीं था. उन सबके प्रति भी आभार और शुभकामनाएं.

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लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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