मैक्लुस्कीगंज. दर्जनों अवैध ईंट भट्ठा से निकलने वाले धुआं से मैक्लुस्कीगंज की आबोहवा में भी प्रदूषण का जहर घुलने लगा. मैक्लुस्कीगंज पिछले दस सालों में अवैध धंधेबाजों का केंद्र बन गया है. ईंट भट्टा संचालकों ने मिल कर लगभग तीन दर्जन अवैध कोयला खदान खोलवा कर उसमें खनन कार्य करा रहे हैं. आसपास के सभी नदियों से प्रतिदिन सैकड़ों वाहन से बालू की चोरी करायी जा रही है. सरकारी जमीन का फर्जी जमाबंदी कर गिने चुने लोग यहां सैकड़ों एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिये हैं. स्थानीय थाना, अंचल, वन, खनन, प्रदूषण आदि कार्यालय के जवाबदेह पदाधिकारियों की भूमिका इसलिए भी संदिग्ध लगता है, क्योंकि उनके द्वारा कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती रही है. ऐसे लोग अक्सर इन सभी कार्यालयों में बहुत प्रभावी ढंग से बैठे हुए दिखाई देते हैं. भारतीय संस्कृति को अन्य देशों से जोड़ने का काम करनेवाली जोभिया स्थित जागृति विहार नामक संस्था का अस्तित्व भी खतरे में है. यहां प्रत्येक वर्ष स्वीडन, नॉर्वे व डेनमार्क आदि से विदेशी पर्यटक व छात्रों का दल शैक्षणिक भ्रमण पर आते रहते हैं, लेकिन संस्था की जमीन बेचने की पूरी तैयारी कर ली गयी है. पिछले दिनों प्रभात खबर में छपी खबर के बाद यह खरीद-बिक्री रुक गयी, लेकिन भीतर ही भीतर इसका अस्तित्व समाप्त करने की पूरी तैयारी कर ली गयी है.
खुल गयी हैं कई अवैध खदान, नदियों से लगातार हो रही बालू चोरी
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