रांची से प्रवीण मुंडा की रिपोर्ट
Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची स्थित पॉक्सो की विशेष अदालत ने नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में दोषी पाए गए आरोपी को 20 साल की कठोर सजा सुनाई है. अदालत ने अभियुक्त उमेंद्र कुमार उर्फ उमेंद्र राय पर 35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना नहीं देने की स्थिति में आरोपी को छह माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. विशेष अदालत ने बीते दिनों साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया था. इसके बाद सोमवार को अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. अभियुक्त 18 अगस्त 2023 से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है.
डोरंडा थाना क्षेत्र का है मामला
पूरा मामला रांची के डोरंडा थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है. अभियोजन पक्ष के अनुसार 13 अगस्त 2023 को 15 वर्षीय नाबालिग लड़की हिनू चौक इलाके में पिज्जा खाने के लिए घर से निकली थी. इसी दौरान आरोपी उमेंद्र राय ने उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया. बताया गया कि आरोपी पीड़िता को एक किराये के कमरे में ले गया, जहां उसे कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया. इस दौरान आरोपी ने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए.
विरोध करने पर दी थी जान से मारने की धमकी
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पीड़िता ने आरोपी के चंगुल से निकलने और अपने परिजनों से संपर्क करने की कोशिश की थी. लेकिन आरोपी उसे लगातार धमकाता रहा. पीड़िता के विरोध करने पर आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी दी थी. डर और दबाव के कारण नाबालिग कई दिनों तक आरोपी के कब्जे में रही. बाद में मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची और जांच शुरू की गई.
मेडिकल रिपोर्ट और गवाह बने अहम साक्ष्य
पुलिस जांच के दौरान पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया. साथ ही पीड़िता का बयान और अन्य साक्ष्य अदालत में पेश किए गए. अभियोजन पक्ष ने कई गवाहों के बयान भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए. सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं. मेडिकल रिपोर्ट, पीड़िता के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को महत्वपूर्ण मानते हुए अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया.
पॉक्सो कानून के तहत हुई सख्त कार्रवाई
यह मामला बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले पॉक्सो कानून के तहत दर्ज किया गया था. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराध गंभीर श्रेणी में आते हैं और ऐसे मामलों में कठोर सजा आवश्यक है. कानूनी जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों में त्वरित सुनवाई और सख्त सजा से पीड़ितों को न्याय मिलता है और समाज में अपराधियों के बीच कानून का भय बना रहता है.
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अभियोजन पक्ष ने फैसले को बताया न्यायपूर्ण
फैसला आने के बाद अभियोजन पक्ष ने अदालत के निर्णय को न्यायपूर्ण बताया. अभियोजन पक्ष के अनुसार अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का गहन अध्ययन करने के बाद दोषी को उचित सजा दी है. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पीड़िता की पहचान और गोपनीयता बनाए रखने का भी विशेष ध्यान रखा. अदालत के इस फैसले को नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है.
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