तमाड़: राज्य के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मां दिऊड़ी मंदिर से महज 800 मीटर दूर स्थित पातरा वन को पर्यटन हब के रूप में विकसित कर यहां चिड़ियाघर स्थापित करने की मांग वर्षों से उठती रही है. स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ क्षेत्र में रोजगार के नये अवसर भी सृजित होंगे.
हालांकि लंबे समय से मांग के बावजूद अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है. पातरा वन की भौगोलिक स्थिति इसे पर्यटन के लिए उपयुक्त बनाती है. यह रांची-टाटा राजमार्ग से सटा हुआ है और मां दिऊड़ी मंदिर के निकट स्थित है, जहां प्रतिदिन झारखंड सहित पड़ोसी राज्यों से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. चिड़ियाघर बनने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक अतिरिक्त आकर्षण मिलेगा तथा वे मंदिर दर्शन के बाद पातरा वन में भी समय बिता सकेंगे.
चिड़ियाघर से पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस परियोजना से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा. साथ ही होटल, रेस्तरां, हस्तशिल्प और परिवहन जैसे स्थानीय व्यवसायों को लाभ होगा. उनका मानना है कि पातरा वन का विकास तमाड़ को राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करने के साथ क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को भी नयी गति देगा.
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि तमाड़ की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत पर्यटन विकास के लिए बड़ी संभावनाएं रखती है. पातरा वन में चिड़ियाघर की स्थापना होने से बच्चों और युवाओं को प्रकृति एवं वन्यजीवों के बारे में सीखने का अवसर मिलेगा. उनका मानना है कि यह पहल तमाड़ ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के पर्यटन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.
ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए पातरा वन में चिड़ियाघर की स्थापना की दिशा में शीघ्र पहल करने की मांग की है. उनका कहना है कि इससे तमाड़ को पर्यटन मानचित्र पर नयी पहचान मिलेगी और क्षेत्रवासियों का वर्षों पुराना सपना साकार हो सकेगा.
तमाड़ के पातरा वन को पर्यटन के रूप में विकसित कर चिड़िया घर की मांग जनभावनाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है. यह परियोजना पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय युवाओं के रोजगार के लिए लाभकारी साबित होगी.
संबंधित विभाग एवं राज्य सरकार के समक्ष इस प्रस्ताव को गंभीरता से उठाऊंगा और इसे धरातल पर उतारने के लिए हरसंभव प्रयास करूंगा.कालीचरण मुंडा, सांसद, खूंटी
