Ranchi News उत्तम तप धर्म का पूजन, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

जैन समाज के प्रमुख पर्व पर्युषण के सातवें दिन बुधवार को उत्तम तप धर्म की पूजा-अर्चना की गयी.

(पर्युषण पर्व) रांची. जैन समाज के प्रमुख पर्व पर्युषण के सातवें दिन बुधवार को उत्तम तप धर्म की पूजा-अर्चना की गयी. इस अवसर पर दोनों मंदिरों में सुबह कलशाभिषेक के बाद विशेष पूजा संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. पंडित अंकित जैन शास्त्री ने कहा कि उत्तम तप आत्मशुद्धि और पवित्रता का प्रतीक है. इसका अर्थ केवल शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि मन, वाणी और कर्मों पर नियंत्रण रखना भी है. तप व्यक्ति को सांसारिक मोह-माया से दूर कर आत्मकल्याण की ओर अग्रसर करता है. उन्होंने बताया कि उपवास, संयम, ध्यान और स्वाध्याय तप के प्रमुख अंग हैं, जो जीवन में अनुशासन और मानसिक शांति लाते हैं. उन्होंने कहा कि वर्तमान भौतिकवादी युग में उत्तम तप धर्म का पालन मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है. यही कारण है कि जैन धर्म में पर्व के दौरान तप को विशेष महत्व दिया जाता है. पूजा-अर्चना के बाद शास्त्र वाचन, मंडल पूजन आदि आयोजन किये गये. अपर बाजार मंदिर में शांति धारा का आयोजन नरेंद्र कुमार, मनोज कुमार गंगवाल परिवार व चंचल कुमार, वंश कुमार टोंग्या परिवार द्वारा किया गया. वहीं, वासुपूज्य जिनालय में कांति कुमार, विकास कुमार गंगवाल व संजय कुमार, नवीन कुमार पापड़ीवाल परिवार द्वारा शांति धारा संपन्न करायी गयी. इस अवसर पर जैन युवा जागृति द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें ‘एक मिनट का महत्व’ विषय पर विशेष प्रस्तुति हुुई. मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के दौरान जैन समाज के लगभग 12 लोगों ने दस दिनों का निर्जला व्रत किया है. समाज उनकी तपस्या की अनुमोदना कर रहा है.

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Author: Raj Kumar

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