JPSC-JSSC विवाद पर विधानसभा घिरी, NDA ने CBI जांच की उठाई मांग

झारखंड विधानसभा के बाहर एनडीए विधायकों ने जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ प्रदर्शन किया और CBI जांच की मांग की.

रांची: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन गुरुवार को जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, भ्रष्टाचार और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर एनडीए के विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया. जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन में उतरे विधायकों ने हाथों में तख्तियां, बैनर और कथित रेट चार्ट लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. विपक्ष ने परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं की सीबीआइ जांच कराने व दोषी अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी करने की मांग की है.

परीक्षाओं में हुई धांधली, नौकरियां बेची गयी : बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र लगातार धरना और अनशन पर बैठे हैं. उनकी मांग केवल उनकी नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के युवाओं की आवाज है. जेएसएससी-सीजीएल, उत्पाद सिपाही और जेपीएससी समेत कई परीक्षाओं में भारी धांधली हुई है और नौकरियां बेची गयी हैं.

जिन परीक्षाओं में अनियमितता के आरोप हैं, उन्हें तत्काल रद्द किया जाये. जेपीएससी और जेएसएससी के अध्यक्ष, सदस्य, सचिव और परीक्षा नियंत्रक रहे अधिकारियों पर एफआइआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए. सीआइडी जांच से अधिकारियों को हटाकर नये अधिकारियों को देना निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है. इसलिए पूरे मामले की जांच केवल सीबीआइ से ही करायी जानी चाहिए.

कांग्रेस के मंत्री व विधायक छात्रों से कब मिलेंगे : नवीन जायसवाल

भाजपा मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने कहा कि छात्रों की जो मांग है, वही एनडीए विधायकों की मांग है. सरकार अपने कार्यकाल की तमाम नियुक्तियों की तत्काल सीबीआइ जांच कराये, तभी सरकार की साख बच पायेगी.

दिल्ली में युवाओं का पीठ थपथपाने वाले कांग्रेस नेता राहुल गांधी पिछले 12 दिनों से आंदोलन कर रहे झारखंडी युवाओं से मिलने क्यों नहीं आ रहे? यह कांग्रेस के दोहरे चरित्र को उजागर करता है. कांग्रेस को बताना चाहिए कि उनके मंत्री और विधायक इन छात्रों से कब मिलेंगे.

सरकार की नीयत खराब : नीरा यादव

पूर्व शिक्षा मंत्री व कोडरमा विधायक नीरा यादव ने कहा कि इस सरकार की नीयत ही खराब है, बिना भ्रष्टाचार के यह सरकार कुछ सोच ही नहीं सकती. पिछले सात सालों में जेपीएससी और जेएसएससी द्वारा ली गयी हर नियुक्ति सवालों के घेरे में है.

हेमंत सरकार ने सरकारी नौकरियों का रेट चार्ट खोल रखा है-पैसा दो, नौकरी पाओ. जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलता, भाजपा मुखर रहेगी. जेपीएससी के बाकी सदस्यों से इस्तीफा क्यों नहीं लिया जा रहा? वे सिर्फ जेएमएम के कार्यकर्ता बने हुए हैं.

परीक्षा माफियाओं ने प्रशासनिक पद का तय कर दिया था रेट : निर्मल महतो

आजसू विधायक निर्मल महतो ने कहा कि यह सिर्फ पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि परीक्षा माफिया ने सामानों की तरह हर प्रशासनिक पद का रेट तय कर दिया था. सरकार ने बाहरी-भीतरी का भेद मिटाकर सिर्फ पैसे को सर्वोपरि रखा.

यूपी और बिहार के जिन छात्रों ने पैसे दिये, उन्होंने सीटें खरीद लीं और मेहनत करने वाले छात्र आज सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं. इस सरकार में डीएसपी पद के लिए 1.20 करोड़, एफआरओ के लिए 80 लाख, बीडीओ के लिए 90 लाख, सीओ के लिए एक करोड़, सीजीएल के लिए 70 लाख और दारोगा पद के लिए 39 लाख रुपये तय थे, पूरे खेल की निष्पक्ष सीबीआइ जांच होना बेहद जरूरी है.


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लेखक के बारे में

By सतीश सिंह

मेरा मीडिया जगत में 25 वर्षों का अनुभव है. 'प्रभात खबर' के प्रमुख संवाददाता के रूप में 22 वर्षों की अपनी यात्रा के दौरान, निष्पक्षता, गहराई और सत्य के प्रति प्रतिबद्धता के साथ पत्रकारिता की है. रांची में रहकर पिछले 15 वर्षों तक हाईकोर्ट रिपोर्टिंग की है. वर्तमान में मैं राजनीतिक और विभागीय रिपोर्टिंग के माध्यम से समाज को जागरूक और शिक्षित करने का कार्य निरंतर कर रहा हूं.

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