रैयतों की अधिग्रहित जमीन का बंद हो म्यूटेशन

रूढ़िवादी संयुक्त ग्रामसभा मंच के तत्वावधान में पिपरवार जीएम ऑफिस के समक्ष शुक्रवार को आदिवासी समाज ने एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया

प्रतिनिधि, पिपरवार.

रूढ़िवादी संयुक्त ग्रामसभा मंच के तत्वावधान में पिपरवार जीएम ऑफिस के समक्ष शुक्रवार को आदिवासी समाज ने एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया. सुष्मिता उरांव की अध्यक्षता में वक्ताओं ने 25 सूत्री मांगों पर बारी-बारी से चर्चा की. सीसीएल द्वारा रैयतों की जमीन का म्यूटेशन का प्रयास मुख्य मुद्दा रहा. आरोप लगाया गया कि सीसीएल ने भूमि अधिग्रहण के लिए 2013 में बने कानून की जगह सीबी एक्ट 1957 के तहत नोटिफिकेशन किया. सीसीएल ने रैयतों की जमीन 25-30 वर्षों के लिए लीज पर लिया था. अब जहां खनन कार्य खत्म हो चुका है, सीसीएल जमीन को समतल और उपजाऊ बना कर रैयतों को सौंपे. राज्य सरकार भी रैयतों की जमीन का रसीद काटना शुरू करे. इसके अलावा विस्थापितों की नौकरी, मुआवजा व पुनर्वास पर भी चर्चा की गयी. विस्थापित प्रभावित क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने, एक एकड़ जमीन के बदले नौकरी देने, पुनर्वास के लिए 25 डीसमिल जमीन उपलब्ध कराने, नौकरी देने में विलंब नहीं करने आदि मांगे की गयी. अंत में आदिवासियों ने प्रबंधन को 25 सूत्री मांग पत्र सौंपा. संचालन राम कुमार उरांव ने किया. वक्ताओं में महेंद्र उरांव, बहुरा मुंडा, बालेश्वर उरांव, धनेश्वर गंझू, अर्जुन गंझू, गणेश भुईयां व अलेक्जेंडर तिग्गा ने किया. मौके पर विजय उरांव, रोहित गंझू, प्रदीप उरांव, सुरेंद्र उरांव, अर्जुन उरांव, रंथू उरांव, राहुल गंझू, गोपाल गंझू, फूलमनी देवी, निर्मला देवी, पुष्पा देवी, रीता देवी, बरखा देवी, संगीता देवी, गीता देवी, सुरेंद्र गंझू, संगीता देवी सहित काफी संख्या में पिपरवार, खलारी व टंडवा कोयलांचल के दर्जनो गांव के लोग उपस्थित थे.

भूमि समतल कर रैयतों को सौंपे सीसीएल

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By JITENDRA RANA

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