जल, जंगल व जमीन की लूट के खिलाफ होगा आंदोलन, विस्थापन पर क्या बोले पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता?

माकपा के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घोषणा की थी की राज्य में जल्द विस्थापित आयोग का गठन किया जाएगा और एक समय सीमा के अंदर विस्थापितों की समस्याओं का निदान किया जाएगा लेकिन यह काम अभी तक लंबित है.

रांची: झारखंड में विस्थापन के मुद्दे पर सरकार उदासीन है. राज्य में विस्थापन का तीसरा दौर शुरू हो गया है. जब से कॉरपोरेट परस्त भाजपा की मोदी सरकार ने कोयला खनन का काम निजी खिलाड़ियों के हवाले करना शुरू किया है, तब से स्थानीय प्रशासन व आउट सोर्सिंग कंपनियों द्वारा नियम कानून को ताक पर रखकर और ग्रामसभा को दरकिनार कर जबर्दस्ती भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है. वामदलों और धर्मनिरपेक्ष पार्टियों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए सीपीआई के पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने आज मंगलवार को ये बातें कहीं.

झूठा मुकदमा दर्ज कर किया जा रहा परेशान

भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि ताजा मामला हजारीबाग जिले में अदाणी इंटरप्राइजेज को आवंटित गोंदलपुरा कोयला खदान का है, जहां जिला प्रशासन द्वारा बुलाई गई जन सुनवाई में ग्रामीणों के प्रचंड बहुमत ने कोयला खदान के लिए जमीन देने से इनकार कर दिया. इसके बाद अदाणी इंटरप्राइजेज के लोगों ने पुलिस प्रशासन को मैनेज कर किसानों और रैयतों पर झूठा मुकदमा दर्ज कर उन्हें परेशान करने की कार्रवाई शुरू कर दी है.

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विस्थापन के खिलाफ लड़ाई होगी तेज

माकपा के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घोषणा की थी की राज्य में जल्द विस्थापित आयोग का गठन किया जाएगा और एक समय सीमा के अंदर विस्थापितों की समस्याओं का निदान किया जाएगा लेकिन यह काम अभी तक लंबित है. जदयू के वरीय नेता गौतम सागर राणा ने कहा कि विस्थापन के सवाल पर वे संयुक्त आंदोलन के साथ हैं. राजद के उपाध्यक्ष राजेश यादव ने कहा कि विस्थापित आयोग की मांग पर आंदोलन को तेज किया जाना चाहिए. एक्टिविस्ट और विस्थापन पर शोध कर रही वासवी ने कहा कि झारखंड मे जितने भी विस्थापन विरोधी आंदोलन चल रहे हैं, उनकी एक संयुक्त बैठक कर समन्वय बनाया जाए. सीपीआई के राज्य सचिव महेंद्र पाठक ने विस्थापन विरोधी सभी संगठनों, किसान संगठनों, आदिवासी संगठनों को भी विस्थापन विरोधी संयुक्त आदोलन का हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया. मासस के सुशांत मुखर्जी ने विस्थापन के खिलाफ लड़ाई को लगातार चलाने की आवश्यकता बताई. बैठक में अन्य लोगों के अलावा सीपीआई के अजय सिंह, अनिरुद्ध, अदाणी इंटर प्राइजेज के खिलाफ लड़ रहे ग्रामीणों के प्रतिनिधि श्रीकांत निराला, मुखिया, इलियास अंसारी, मुखिया, योगेश्वर महतो ने भाग लिया.

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ये बनी रणनीति

संयुक्त बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वाम और धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के नेताओं ने विस्थापन के खिलाफ आगामी चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की. इसके तहत 7 मई को हजारीबाग के बड़कागांव प्रखंड में अवस्थित गोंदलपुरा कोयला खदान, जो अदाणी इंटरप्राइजेज को आवंटित किया गया है, उसे रद्द किये जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों से मिलने, झारखंड में जहां-जहां विस्थापितों के संगठन आंदोलन कर रहे हैं, उनको चिन्हित कर मई महीने में उनकी संयुक्त बैठक आयोजित करने, जून के अंतिम सप्ताह में एक राज्य स्तरीय कन्वेंशन किए जाने और इस वर्ष के अंत में राजधानी रांची में एक बड़ी रैली किए जाने का ऐलान किया गया.

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