Monsoon Bomb: झारखंड में फटेगा मानसून ‘बम’, भारी बारिश से 12 जिलों में तबाही मचायेगी बाढ़, IMD का अलर्ट

Monsoon Bomb: आईएमडी ने सोमवार 7 जुलाई और मंगलवार 8 जुलाई के लिए एक स्पेशल बुलेटिन जारी की गयी है, जिसमें कहा गया है कि 7 जुलाई को सुबह 8:30 बजे गंगा के तटवर्ती पश्चिम बंगाल और उसके आसपास के क्षेत्र में निम्न दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बना है, जो दक्षिण-पश्चिम गांगेय पश्चिम बंगाल और उसके आसपास केंद्रित है.

Monsoon Bomb: झारखंड में मानसून की एंट्री के बाद से लगातार बारिश हो रही है. सामान्य से 70 फीसदी अधिक बारिश हो चुकी है. अब झारखंड में मानसून ‘बम’ फटने वाला है. मौसम विभाग ने इसकी चेतावनी दी है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के हाइड्रोमेट डिवीजन के फ्लैश फ्लड गाइडेंस सेल ने 8 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश और 12 जिलों में फ्लैश फ्लड यानी अचानक बाढ़ आने की चेतावनी जारी की है.

Monsoon Bomb: 12 जिलों में बाढ़ का खतरा

फ्लैश फ्लड गाइडेंस सेल ने कहा है कि भारी से बहुत भारी बारिश के बाद गढ़वा, पलामू, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, खूंटी, रांची, सरायकेला, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और बोकारो जिले में बाढ़ आ सकती है, जिससे भारी तबाही मचेगी.

24 से 48 घंटे तक भारी से बहुत भारी बारिश होगी

मौसम विभाग ने कहा है कि 2 दिन का मौसमी तंत्र झारखंड के लिए भारी पड़ने वाला है. 24 से 48 घंटे के भीतर कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होगी, जिससे खेती-किसानी भी प्रभावित होगी और कुछ जगहों पर बाढ़ से जान-माल का नुकसान होने की आशंका है.

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मौसम विभाग ने जारी किया स्पेशल बुलेटिन

सोमवार 7 जुलाई और मंगलवार 8 जुलाई के लिए एक स्पेशल बुलेटिन जारी की गयी है, जिसमें कहा गया है कि 7 जुलाई को सुबह 8:30 बजे गंगा के तटवर्ती पश्चिम बंगाल और उसके आसपास के क्षेत्र में निम्न दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बना है, जो दक्षिण-पश्चिम गांगेय पश्चिम बंगाल और उसके आसपास केंद्रित है.

झारखंड की ओर बढ़ेगा साइक्लोनिक सर्कुलेशन

मौसम विभाग के बुलेटिन में कहा गया है कि निम्न दबाव से संबंधित चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) समुद्र तल से 7.6 किलोमीटर ऊपर तक फैला है. अगले 2 दिन में इसके धीरे-धीरे पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में झारखंड और उत्तरी छत्तीसगढ़ होते हुए आगे बढ़ने की संभावना है.

झारखंड के इस शहर से गुजर रहा ट्रफ

वहीं, समुद्र तल पर ट्रफ राजस्थान के श्रीगंगानगर, हरियाणा के सिरसा, उत्तर प्रदेश के मेरठ और वाराणसी, झारखंड के डालटनगंज, पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, दक्षिण-पश्चिम गांगेय पश्चिम बंगाल और उसके आसपास के इलाकों में बने लो प्रेशर एरिया के केंद्र से पूर्व-दक्षिण-पूर्व की ओर उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तक गुजर रहा है.

‘48 घंटे में दिखेगी तबाही, सतर्क रहें’

इन वेदर कंडिशंस का सम्मिलित असर झारखंड में अगले 24 से 48 घंटे में दिखेगा. कुछ जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा होगी. इसलिए मौसम विभाग ने लोगों से कहा है कि वे सतर्क और सावधान रहें, क्योंकि तेज हवाओं के साथ वज्रपात भी होने की आशंका है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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