Ranchi News: बिरसा जू में शेर शशांक की मौत, पोस्टमॉर्टम में सामने आये कैंसर के लक्षण

Ranchi News: ओरमांझी के बिरसा जैविक उद्यान में गुरुवार को शशांक नाम के नर शेर की मौत हो गयी. पोस्टमॉर्टम में शेर के पेट में कैंसर के लक्षण दिखे. पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर एम के गुप्ता बताते हैं कि शशांक एक हाइब्रिड शेर था. हाइब्रिड नस्ल के जीव में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है. साथ ही संक्रमण का खतरा भी हमेशा बना रहता है.

Ranchi News | ओरमांझी, रोहित लाल महतो: रांची के ओरमांझी स्थित भगवान बिरसा जैविक उद्यान में गुरुवार को शशांक नाम के शेर की मौत हो गयी. प्रौढ़ावस्था में होने के कारण हाइब्रिड नर शेर शशांक के शरीर में नियमित रूप से सभी अंग काम भी नहीं कर रहे थे. पिछले एक महीने से उसका इलाज चल रहा था. लंबे समय से बीमार शशांक का इलाज उद्यान के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ ओमप्रकाश साहु की देखरेख में किया जा रहा था.

पेट में कैंसर के लक्षण

इसके अलावा रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय के विशेषज्ञ डॉ अभिषेक कुमार के द्वारा शशांक की जांच करवायी गयी. गुरुवार को जू में ही रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय के पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ एम के गुप्ता के नेतृत्व में शेर का पोस्टमॉर्टम किया गया.

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इस दौरान डॉ गुप्ता की टीम भी उनके साथ जुड़ी थी. पोस्टमॉर्टम के बाद डॉ गुप्ता ने नर शेर की मौत का कारण उसके पेट में कैंसर का लक्षण होना बताया. वहीं, गहन जांच के लिए मृत शेर के विभिन्न अंगों का सैंपल लेकर रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय भेजा गया है.

हाइब्रिड नस्ल को संक्रमण का खतरा

इस मामले में डॉ गुप्ता ने बताया कि हाइब्रिड नस्ल के वन्य जीव की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है एवं संक्रमण का खतरा भी हमेशा बना रहता है. इनकी औसत उम्र लगभग 15 से 16 साल होती है. जानकारी के अनुसार, शेर शशांक के पोस्टमॉर्टम के समय जैविक उद्यान के पदाधिकारी कर्मचारी एवं कर्मी भी मौजूद थे.

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2014 में बिरसा जू लाया गया था शशांक

मालूम हो कि शशांक नामक शेर को 2014 में बन्नरघटा चिड़िया घर बेंगलुरू से लाया गया था. जैविक उद्यान प्रबंधन के अनुसार वर्तमान में मृतक शशांक नामक शेर की उम्र 15 साल है. याद होगा की करीब एक महीने पहले 26 मई 2025 को उद्यान की प्रियंका नामक शेरनी की मौत लंबी उम्र होने के कारण किडनी फेल हो जाने से हो गयी थी. अब भगवान बिरसा जैविक उद्यान में एक शेर अभय और एक शेरनी शबरी बचे हैं.

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By Rupali das

नमस्कार! मैं रुपाली दास, एक समर्पित पत्रकार हूं. एक साल से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. वर्तमान में प्रभात खबर में कार्यरत हूं. यहां झारखंड राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक, राजनीतिक और जन सरोकार के मुद्दों पर आधारित खबरें लिखती हूं. इससे पहले दूरदर्शन, हिंदुस्तान, द फॉलोअप सहित अन्य प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों के साथ भी काम करने का अनुभव है.
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