रांची. संत जेवियर्स कॉलेज रांची में शनिवार को जेवियर इकोनॉमिक सोसाइटी और आइक्यूएसी के बैनर तले व्याख्यान हुआ. विषय था : वर्ष 1800 के बाद से ज्ञान और वैश्विक असमानता. मुख्य वक्ता इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन डेवलपमेंट, नयी दिल्ली के अर्थशास्त्री प्रो देवनाथ थे. उन्होंने वर्ष 1800 के बाद ज्ञान और वैश्विक असमानता पर अपनी बातें रखी. 1800 से 1950 तक के ””ग्रेट डाइवर्जेंस”” पर प्रकाश डाला, जिसमें उन्नत तकनीकी ज्ञान पर यूरोपियन देशों के एकाधिकार का वर्णन किया गया है. उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति के लिए ज्ञान सृजन का काफी महत्व है.
शिक्षा को उद्योग से जोड़ने पर जोर
डॉ हरीश्वर दयाल ने शिक्षा को उद्योग से जोड़ने पर जोर दिया. इस दौरान ब्रिटिश अर्थशास्त्री जेम्स ए रॉबिन्सन की किताब वाई नेशन फेल्स की विवेचना की. बीएड विभागाध्यक्ष डॉ फादर फ्लोरेंस पूर्ति एसजे ने बताया कि भारत में ज्ञान की प्रचुरता है, लेकिन इसका सही उपयोग नहीं हो रहा है. उन्होंने ज्ञान और अनुसंधान में अधिक निवेश करने की बात कही. अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ मारकुस बारला ने भी विचार दिये. इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व प्राचार्य डॉ फादर नाबोर लकड़ा के स्वागत भाषण से हुई. इस अवसर पर प्रो आशीष रंजन, प्रो अंशु कुजूर, डॉ धीरजमणि पाठक आदि उपस्थित थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
