रांची : झारखंड में जमीन के दाखिल-खारिज (ई-म्यूटेशन) की प्रक्रिया प्रशासनिक सुस्ती और तकनीकी उलझनों के कारण पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है. राज्य में ई-म्यूटेशन के पेंडिंग मामलों की संख्या 65 हजार के पार पहुंच गई है. राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के वसुधा पोर्टल v2.0 के ताजा आंकड़ों से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है. राज्य में अब तक दाखिल-खारिज के कुल 25,67,396 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 65,556 आवेदन वर्तमान में अटके हुए हैं.
निपटाए कम, खारिज किए ज्यादा
सरकारी पोर्टल के आंकड़ों का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि राज्य में जितने दाखिल-खारिज आवेदनों का निबटारा हुआ है, उससे कहीं अधिक आवेदनों को सीधा खारिज (Reject) कर दिया गया है. पोर्टल के अनुसार, अब तक 12,31,884 मामलों का निष्पादन किया गया है, जबकि 12,69,956 आवेदन निरस्त कर दिए गए. यानी स्वीकृत या निपटाए गए मामलों की तुलना में 38,072 अधिक आवेदन खारिज हुए हैं, जो पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
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अंचल कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर आम लोग
दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी होने में औसतन 66 दिन लग रहे हैं, जबकि नियमानुसार यह काम तय सीमा के भीतर होना चाहिए. अंचल अधिकारी (CO), राजस्व उप निरीक्षक (CI) और संबंधित कार्यालयों के स्तर पर महीनों फाइलें दबी रहती हैं. जमीन खरीद-बिक्री के बाद मालिकाना हक दर्ज कराने के लिए म्यूटेशन बेहद अनिवार्य है. ऐसे में आवेदनों के लटके रहने और बड़ी संख्या में खारिज होने से आम नागरिकों को जमीन के रिकॉर्ड दुरुस्त कराने और आगे की खरीद-बिक्री में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, 22 अगस्त को आए 1,017 नए आवेदनों के मुकाबले 1,194 मामलों का निष्पादन किया गया, लेकिन उसी दिन 958 आवेदनों का खारिज होना यह दर्शाता है कि आवेदनों को निपटाने के नाम पर उन्हें खारिज करने का शॉर्टकट अपनाया जा रहा है.
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