Kurmi Andolan: 'कुड़मी समुदाय की मांग जायज, नहीं ली जाए धर्य की परीक्षा' मुरी में बोले आजसू प्रमुख सुदेश महतो

Kurmi Andolan: आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने कहा कि कुड़मी समुदाय धैर्य के साथ पिछले 90 वर्षों से अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ लड़ता आ रहा है. धैर्य की अब और परीक्षा नहीं ली जाए. राज्य और केंद्र सरकार अविलंब इस मामले में फैसला लें. वे आज शनिवार को मुरी में कुड़मी समाज के रेल टेका, डहर छेका आंदोलन में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे.

Kurmi Andolan: रांची-झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने कहा है कि आजसू पार्टी लगातार कुड़मी समाज के साथ खड़ी रही है. कुड़मी समुदाय धैर्य के साथ पिछले 90 वर्षों से अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ लड़ता आ रहा है. इसके धैर्य की अब और परीक्षा नहीं ली जाए. अब समय आ गया है कि राज्य और केंद्र सरकार अविलंब फैसला लें. वे आज शनिवार को मुरी में कुड़मी समाज के रेल टेका, डहर छेका आंदोलन में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे.

सफल रहा रेल टेका-डहर छेका आंदोलन-सुदेश महतो


सुदेश महतो ने कहा कि कुड़मी समुदाय ने अपनी ताकत दिखा दी है. कुड़मी को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने और कुड़मालि भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता दिलाने की ऐतिहासिक मांग को लेकर झारखंड सहित आसपास के राज्यों में “रेल टेका-डहर छेका” आंदोलन सफल रहा है. कुड़मी समाज को 1931 में एसटी सूची से बाहर कर दिया गया था. तब से यह समाज अपने अधिकारों की लड़ाई लगातार लड़ रहा है.

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सुदेश महतो का हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप


सुदेश महतो ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि पहले दिवंगत शिबू सोरेन और 2019 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वयं कुड़मी समाज की मांग को स्वीकार करते हुए उस पर अपनी सहमति जताई थी और हस्ताक्षर भी किए थे, लेकिन आज वही झामुमो अपने रुख से पीछे हट रहा है. उन्होंने कहा कि यह एक लंबी लड़ाई है. जैसे देश की आज़ादी एक दिन में नहीं मिली, वैसे ही समाज ने समय के साथ जागरूकता और एकता के बल पर अपनी आवाज बुलंद की है. वर्तमान सरकार इस विषय पर गंभीर नहीं दिख रही है और लगातार अपने रुख में बदलाव कर रही है.

जल्द निकले समाधान-सुदेश महतो


सुदेश महतो ने कहा कि आजसू पार्टी ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर 16 संगठनों के साथ मिलकर भारत सरकार के समक्ष रखा है और गंभीर विचार-विमर्श के लिए प्रस्ताव भी सौंपा है. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि राज्य और केंद्र सरकार मिलकर जल्द से जल्द इस मुद्दे का समाधान निकालें, ताकि समाज का आक्रोश शांत हो और न्याय सुनिश्चित हो सके.

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लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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