असम में गरजीं कल्पना सोरेन, कहा- बदलाव के लिए तैयार है जनता, लगा दी वादों की झड़ी

Kalpana Soren: असम विधानसभा चुनाव 2026 के रण में झामुमो की स्टार प्रचारक कल्पना सोरेन ने मोर्चा संभाल लिया है. सोमवार को मजबत और औरंगाजुली में जनसभाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने चाय बागान श्रमिकों के लिए 500 रुपये न्यूनतम मजदूरी और महिलाओं के लिए 2500 रुपये मासिक सम्मान राशि का ऐतिहासिक वादा किया. पढ़ें, उनके भाषण की बड़ी बातें.

Kalpana Soren, रांची (सुनील चौधरी की रिपोर्ट): झारखंड मुक्ति मोर्चा की कद्दावर नेता और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने सोमवार को असम के चुनावी समर में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. इसी के मद्देनजर उन्होंने सोमवार को मजबत और औरंगाजुली विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी रैलियों को संबोधित किया. इस दौरान कल्पना सोरेन ने दावा किया कि असम की जनता वर्तमान व्यवस्था से त्रस्त है और अब राज्य में परिवर्तन की लहर साफ दिखाई दे रही है. उन्होंने मंच से आह्वान किया कि मतदाता अपने अधिकारों के प्रति सजग हो चुके हैं और इस बार का मतदान केवल प्रत्याशी चुनने के लिए नहीं, बल्कि असम के भविष्य को नई दिशा देने के लिए होगा.

आदिवासी अस्मिता और सम्मान का मुद्दा


कल्पना सोरेन ने अपने संबोधन के दौरान ‘आदिवासी कार्ड’ खेलना नहीं भूलीं और इस चुनाव को हक और सम्मान की लड़ाई करार दिया. उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि झामुमो हमेशा से जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है और असम के आदिवासी समाज का गौरव वापस लौटाना उनकी प्राथमिकता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता का अटूट विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है और इस भरोसे की रक्षा के लिए वे किसी भी हद तक संघर्ष करने को तैयार हैं.

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चुनावी वादों का पिटारा: मजदूरी और सम्मान राशि पर फोकस

पार्टी के विजन को जनता के समक्ष रखते हुए कल्पना सोरेन ने जनकल्याणकारी योजनाओं की घोषणा करना नहीं भूली. उन्होंने वादा किया कि यदि जनता झामुमो को शक्ति प्रदान करती है, तो चाय बागान के श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 500 रुपये की जाएगी. इसके साथ ही महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रति माह 2500 रुपये की सम्मान राशि, हर परिवार को पक्का आवास, बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और युवाओं के लिए स्थायी रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि ये घोषणाएं महज चुनावी जुमले नहीं हैं, बल्कि ये जनता के वे बुनियादी अधिकार हैं जिन्हें अब तक उनसे दूर रखा गया है.

एकजुटता और बदलाव की निर्णायक अपील

रैली के अंत में कल्पना सोरेन ने असम के विभिन्न समुदायों से एकजुट होने की अपील की. उन्होंने कहा कि जब तक जनता संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद नहीं करेगी, तब तक उनका शोषण जारी रहेगा. 9 अप्रैल को होने वाले मतदान को लेकर उन्होंने मतदाताओं को जागरूक करते हुए कहा कि उनका एक-एक वोट बदलाव की इस महाक्रांति में नींव का पत्थर साबित होगा.

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लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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