रांची से मनोज कुमार सिंह की रिपोर्ट
रांची: राजधानी रांची के आड्रे हाउस परिसर में बुधवार को सारथी एवं झारखंड जस्ट ट्रांजिशन नेटवर्क के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय 'जलवायु अखड़ा-2026' का भव्य शुभारंभ हुआ. कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज आज भी अपना पारंपरिक जीवन जीता है और जन्म से लेकर मृत्यु तक प्रकृति से गहराई से जुड़ा रहता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी संस्कृति पहले प्रकृति को देने का स्वभाव रखती है और जब हम खुद बदलेंगे, तभी माहौल, देश और झारखंड की तस्वीर बदलेगी.
जल, जंगल और जमीन की लड़ाई आज भी जारी: कल्पना सोरेन
समारोह को संबोधित करते हुए कल्पना सोरेन ने कहा कि सृष्टि की रक्षा और अपने अधिकारों के लिए सबसे अधिक संघर्ष आदिवासियों ने किया है. आदिवासी मानते हैं कि मिट्टी और धरती पर उनका प्राकृतिक अधिकार है. यह लड़ाई अतीत की बात नहीं है, बल्कि आज भी जारी है. उन्होंने कहा कि हम अपनी जीवन शैली में थोड़ा बदलाव लाकर जलवायु संरक्षण के लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं. झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के पहाड़, नदियां और हिल स्टेशन हर किसी को आकर्षित करते हैं. युवा साथियों के साथ मिलकर सुंदर झारखंड को अब और समृद्ध बनाना है, जिसके लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है.
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बढ़ती आबादी और खनन से प्राकृतिक संसाधन संकट में
इससे पूर्व कार्यक्रम में विचार व्यक्त करते हुए वन विभाग के पीसीसीएफ (ईडी) एटी मिश्र ने चेतावनी दी कि बढ़ती जनसंख्या और मानवीय जरूरतों के कारण प्राकृतिक संसाधन गहरे संकट में हैं. जंगलों की अंधाधुंध कटाई और अत्यधिक खनन से निपटने के लिए हमें अपनी छोटी-छोटी दैनिक आदतों में सुधार करना होगा. जेएसएलपीएस (JSLPS) के सीईओ अनन्या मित्तल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन न केवल पर्यावरण, बल्कि लोगों की आजीविका पर भी सीधा प्रहार कर रहा है. वहीं, नाबार्ड की सीजीएम दीपमाला घोष ने जलवायु मुद्दों पर मिलकर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया.
अखड़ा संस्कृति और जल-जंगल-जमीन का महत्व
फिया फाउंडेशन के ईडी जॉनसन टोपनो ने कहा कि 'अखड़ा' आदिवासी संस्कृति का जीवंत प्रतीक है, जहां लोग संवाद करते हैं और समस्याओं का समाधान खोजते हैं. झारखंड सिर्फ खनिजों का भंडार नहीं, बल्कि यह हमारी जल, जंगल और जमीन का सार है. कार्यक्रम में असर संस्था की सीईओ विनुता गोपाल ने बताया कि सारथी 43 संस्थाओं का एक मजबूत समूह है जो मिलकर पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है. अभिव्यक्ति फाउंडेशन के सचिव कृष्णकांत ने भी अपने विचार रखे, जबकि धन्यवाद ज्ञापन असर संस्था के मुन्ना झा ने किया.
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