रांची: TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने सीआईडी को दिए बयान में दावा किया है कि उसे परीक्षा से पहले JSSC CGL का प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराए गए थे, जिसके आधार पर उसका चयन हुआ. हालांकि सीआईडी ने अभय तिवारी के इस बयान की आधिकारिक पुष्टि करने से इनकार किया है, लेकिन उसके बयान से जांच को नया मोड़ मिला है. सीआईडी की पूछताछ में अभय तिवारी ने बताया कि टीडीपीएल कंपनी को पहले जेएसएससी की परीक्षाओं के संचालन का कार्य मिलता था. उसने कहा कि कंपनी ने कम दर पर परीक्षा संचालन का काम करने से इनकार कर दिया था. इसके बाद टीडीपीएल ने जेएसएससी का काम छोड़ दिया और जेएसएससी ने कंपनी को डी-इंपैनल कर दिया. अभय के अनुसार, टीडीपीएल को हटाए जाने के बाद परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी वेबल नामक एजेंसी को दी गई.
अभय तिवारी ने वेबल एजेंसी पर भी लगाया आरोप
अभय तिवारी ने अपने बयान में आरोप लगाया कि वेबल एजेंसी से जुड़े लोगों ने उसे सीजीएल परीक्षा के प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराए थे. उसने दावा किया कि वेबल एजेंसी के मालिक पटना निवासी मिथिलेश सिंह थे और खूंटी निवासी उमाकांत प्रमाणिक उनके साझेदार थे. अभय ने कहा कि इन लोगों से उसके संबंध थे और इन्हीं के माध्यम से उसे परीक्षा के प्रश्न-उत्तर पहले से उपलब्ध कराए गए. पूछताछ में अभय ने यह भी बताया कि मिथिलेश सिंह के सहयोगी राकेश सिंह ने बोकारो स्थित एक आवास में 15 अभ्यर्थियों को प्रश्न और उत्तर रटवाए थे. उसके अनुसार इन अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले तैयार कराया गया था. अभय ने आरोप लगाया कि एजेंसी ने 65 प्रश्नों के प्रश्न-उत्तर उपलब्ध कराने के बदले सभी 15 अभ्यर्थियों से 12-12 लाख रुपये वसूले थे. इस तरह कुल बड़ी रकम की वसूली किए जाने का दावा किया गया है.
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अभय तिवारी ने स्वीकारा कि उसके भाई और पत्नी का भी हुआ चयन
अभय तिवारी ने अपने बयान में स्वीकार किया कि इसी व्यवस्था के कारण उसका, उसके भाई अक्षय तिवारी और उसकी पत्नी सुषमा कुमारी का चयन हुआ. उसने कहा कि प्रश्न-उत्तर पहले से मिलने के कारण वे परीक्षा में सफल हुए. जानकारी के अनुसार अक्षय तिवारी महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग, धुर्वा में कार्यरत हैं, जबकि सुषमा कुमारी निगरानी विभाग में पदस्थापित हैं. अभय तिवारी की नियुक्ति प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के रूप में पोडैयाहाट में हुई थी. सीआईडी सूत्रों के अनुसार अभय तिवारी से लंबे समय तक पूछताछ की गई है और उसके बयान के आधार पर कई बिंदुओं की जांच की जा रही है. हालांकि जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि केवल बयान के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता और सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है.
टीडीपीएल के अकाउंटेंट रक्षक सिंह के खिलाफ भी कार्रवाई
इधर टीडीपीएल के अकाउंटेंट रक्षक सिंह के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है. सीआईडी ने उसे छह अगस्त को गिरफ्तार किया था. आरोप है कि कंपनी में कर्मचारी रहते हुए उसने गलत तरीके से जेपीएससी पीटी परीक्षा दी थी और उसमें सफल भी हुआ था. सीआईडी ने उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की. रिमांड अवधि पूरी होने के बाद सोमवार को उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. रक्षक सिंह की गिरफ्तारी और अभय तिवारी के बयान के बाद जेपीएससी और जेएसएससी दोनों परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. जांच एजेंसियां अब परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों, एजेंसियों और चयनित अभ्यर्थियों के बीच संभावित संबंधों की भी पड़ताल कर रही हैं.
सीआईडी को अभय तिवारी की बातों पर भरोशा नहीं
सीआईडी ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि अभय तिवारी के आरोपों में कितनी सच्चाई है. एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. लेकिन इस बयान के सामने आने के बाद राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर बहस तेज हो गई है और अभ्यर्थी पूरे मामले की निष्पक्ष तथा व्यापक जांच की मांग कर रहे हैं.
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