रांची से नवीन शर्मी की रिपोर्ट
रांची : जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के जरिये नियुक्त हुए कर्मियों के लिए झारखंड हाईकोर्ट का ताजा फैसला बड़ी राहत लेकर आया है. राज्य सरकार द्वारा नियुक्ति रद्द किए जाने के नोटिफिकेशन पर हाईकोर्ट द्वारा रोक (Stay) लगाए जाने के बाद नवनियुक्त कर्मियों में खुशी का माहौल है. कर्मियों ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और अदालत ने उनकी बात सुनी है. अब सभी कर्मियों की निगाहें कार्मिक विभाग द्वारा जारी होने वाली आधिकारिक चिट्ठी पर टिकी हैं. विभागीय आदेश जारी होते ही चयनित कर्मी सोमवार से दोबारा अपनी ड्यूटी पर योगदान दे सकते हैं. संभावना है कि विभाग जल्द ही इससे संबंधित अधिसूचना जारी कर सकता है.
सीजीएल कर्मी संजीत बोले- आगे भी न्याय मिलने की उम्मीद
जेएसएससी सीजीएल कर्मी संजीत ने कहा कि नियुक्ति रद्द होने के बाद सभी कर्मी बेहद चिंतित थे. उन्हें उम्मीद थी कि न्यायालय उनकी बात सुनेगा. हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें राहत मिली है और अब उम्मीद है कि आगे भी न्याय मिलेगा. वहीं, ऋषिकेश ने कहा कि सरकार की ओर से नियुक्ति रद्द किए जाने के बाद नौकरी को लेकर चिंता बढ़ गई थी. उन्होंने कहा कि अब हाईकोर्ट के फैसले से राहत मिली है और उम्मीद है कि जल्द ही सभी कर्मी वापस अपनी ड्यूटी पर लौटेंगे.
आर्थिक संकट की बढ़ी थी चिंता
जेएसएससी सीजीएल कर्मी निर्मला सांगा ने कहा कि नियुक्ति रद्द होने के बाद उनके सामने आर्थिक चुनौती खड़ी हो गई थी. परिवार के भरण-पोषण को लेकर चिंता सता रही थी. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से राहत नहीं मिली, लेकिन अब न्यायालय के आदेश से बड़ी राहत मिली है.
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नौकरी पर मंडरा रहा था संकट
गौरतलब है कि 18 अगस्त को कैबिनेट के फैसले के बाद सरकार ने जेएसएससी सीजीएल के तहत की गई नियुक्तियों को रद्द करने से संबंधित नोटिफिकेशन जारी कर दिया था. इसके बाद चयनित कर्मियों के सामने अचानक बेरोजगारी और गहरे आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो गई थी. कर्मियों के अनुसार परिवार के भरण-पोषण से लेकर दैनिक जिम्मेदारियों को लेकर चिंता बढ़ गई थी. इस फैसले के खिलाफ 21 अगस्त को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने नियुक्ति रद्द करने के सरकारी आदेश पर स्टे लगा दिया.
15 सितंबर को अगली सुनवाई, जमा करना होगा एफिडेविट
इस मामले में हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की है. अदालत ने JSSC CGL कर्मियों को एक एफिडेविट (शपथ पत्र) दाखिल करने का निर्देश दिया है. इसमें कर्मियों को यह स्पष्ट करना होगा कि यदि भविष्य में जांच के दौरान कोई अभ्यर्थी व्यक्तिगत रूप से दोषी पाया जाता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी उसी की होगी और उसकी सेवा समाप्त की जा सकेगी. इसके साथ ही राज्य सरकार को भी मामले में अपना एफिडेविट दाखिल करने का आदेश दिया गया है.
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