Jharkhand High Court: झारखंड सरकार की ओर से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सहायक वन संरक्षक (SCF) और वन क्षेत्र पदाधिकारी (रेंजर) प्रतियोगिता परीक्षा को रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट ने सोमवार को तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने याचिकाकर्ता की दलील सुनने के बाद राज्य सरकार को मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश भी दिया है. अदालत ने फिलहाल सरकार के रद्दीकरण आदेश पर अंतरिम राहत देने से मना कर दिया, जिससे सरकार का फैसला फिलहाल प्रभावी रहेगा. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए राज्य सरकार से अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है. भर्ती परीक्षाओं को लेकर पहले से चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच यह फैसला अहम माना जा रहा है.
हाईकोर्ट की मॉनिटरिंग में चल रही थी भर्ती प्रक्रिया
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि सहायक वन संरक्षक और वन क्षेत्र पदाधिकारी की भर्ती प्रक्रिया पहले से हाईकोर्ट के आदेश के तहत आगे बढ़ रही थी. दलील दी गयी कि एक जनहित याचिका में पारित आदेश के आलोक में इन दोनों प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन किया गया था और हाईकोर्ट खुद इस पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग कर रहा था. याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि अदालत ने पहले नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी करने का निर्देश दिया था. इसी सिलसिले में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की ओर से प्रारंभिक (पीटी) और मुख्य परीक्षा दोनों आयोजित की जा चुकी हैं. ऐसे में भर्ती प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी थी.
सरकार के आदेश को चुनौती
याचिका में कहा गया कि परीक्षा की विभिन्न चरणों के पूरा होने के बाद राज्य सरकार ने अचानक संबंधित विज्ञापन को रद्द कर दिया. याचिकाकर्ता ने इस फैसले को मनमाना बताते हुए अदालत से सरकार के रद्दीकरण आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की. हालांकि, जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया. अदालत ने फिलहाल किसी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए राज्य सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.
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महाधिवक्ता ने रखा सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय ने पक्ष रखा. उन्होंने सरकार का पक्ष अदालत के सामने पेश किया, जिसके बाद अदालत ने मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश पारित किया. अब इस मामले में सरकार के जवाब के बाद हाईकोर्ट आगे की सुनवाई करेगा. इस फैसले पर बड़ी संख्या में उन अभ्यर्थियों की नजर टिकी है, जिन्होंने पहले ही पीटी और मुख्य परीक्षा पास कर भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण का इंतजार किया था. फिलहाल अदालत के अंतरिम राहत से इनकार करने के कारण सरकार का परीक्षा रद्द करने का आदेश प्रभावी बना हुआ है.
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