रांचीः झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामले में अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने अभ्यर्थी सुमन सौरभ को गिरफ्तार किया है. पूछताछ के बाद गुरुवार को उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. यह गिरफ्तारी सीआईडी ने हजारीबाग पुलिस की सहायता से की. जांच के दौरान झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा, 2025 की प्रारंभिक परीक्षा में अभ्यर्थी सुमन सौरभ द्वारा गड़बड़ी किए जाने के सबूत मिले हैं. जांच के दौरान आरोपी सुमन सौरभ के पास से ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी बरामद नहीं हुई. पूछताछ में अभ्यर्थी ने परीक्षा में अनुचित तरीका अपनाने की बात स्वीकार की.
सीआईडी के मुताबिक, मामले की जांच जारी है. साक्ष्यों के आधार पर आगे कार्रवाई होगी. इधर सीआईडी ने जेपीएससी की परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता कुमार गुप्ता समेत शुरू में गिरफ्तार 5 लोगों की रिमांड अवधि दो दिनों के लिए बढ़ा दी है. जेपीएसएसी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को भी शुक्रवार को पृछताछ के लिए फिर बुलाया गया है. उनसे अबतक की पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर जेपीएससी ऑफिस से कुछ और दस्तावेज मांगे गए हैं. इन दस्तावेजों को देखने के बाद सीआईडी यह तय करेगा कि क्या टीडीपीएल ने परीक्षा के लिए तय एसओपी में बदलाव किये थे.
OMR शीट में बाद में सही उत्तर पर घेरा लगा पास कराने का हुआ खेल
जांच एजेंसी के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अबतक की जांच में प्रश्न पत्र लीक करने के तथ्य सामने नहीं आए हैं, बल्कि ओएमआर शीट में सही उत्तर को परीक्षा के बाद घेरा लगाकर पास कराने का खेल सामने आ रहा है. जिन अभ्यर्थी से सेटिंग हो जाती थी, उन्हें कहा जाता था कि जिस प्रश्न का उत्तर सही में पता हो, उसको ही घेरना है. बाकी को खाली रखना है. साथ ही ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी भी उसके साथ हो छोड़ देनी है. जिससे कि बाद में सही उत्तर में घेरा लगा सेटिंग वाले अभ्यर्थी को आराम से पास कराया जा सके. इससे हल्ला भी नहीं होगा और खेला भी हो जाएगा. ऐसे में अब जो अभ्यर्थी सेटिंग से पास हुए हैं और उनके पास अगर ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी नहीं होगी, तो वह भी सीआईडी से आगे की जांच में जद में आ सकते हैं. इससे इंकार नहीं किया जा सकता है.
सौरभ ने OMR शीट में 48 ही उत्तर घेरे थे फिर भी हुआ चयन
14वीं जेपीएससी के पीटी का परिणाम आने के बाद एक ओएमआर शीट वायरल हुई थी. इसमें 100 में से सिर्फ 48 प्रश्नों का उत्तर घेरा हुआ दिखाया गया था. फिर भी इसका सेलेक्शन पीटी में हो गया. यह ओएमआर शीट बड़कागांव निवासी सुमन सौरभ की थी. सीआईडी की गिरफ्तारी से पहले इससे हजारीबाग की पुलिस ने भी दो दिनों तक पूछताछ की थी. आरोपी ने कबूला है कि वह परीक्षा पास कराने वाले सेंटर के संपर्क में था. उसके कुछ मूल प्रमाण पत्र भी सेटर के पास थे. पीटी पास कराने के एवज में सेंटर को तय रकम भी पहुंचाई थी. यही वजह थी कि उसके पास से ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी नहीं मिली.
सीआईडी ने पूछा, टीडीपीएल को कैसे मिला कार्यादेश
परीक्षाओं और नियुक्तियों में गड़बड़ी के आरोपों की जांच कर रही सीआइडी की टीम ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) से छह बिंदुओं पर तत्काल जवाब मांगा है. आयोग से पूछा गया है कि टीडीपीएल एजेंसी को किस आधार पर परीक्षा का कार्यादेश दिया गया. साथ ही एजेंसी की चयन प्रक्रिया की भी विस्तृत जानकारी मांगी गई है. इसके अलावा सीआईडी ने आयोग से पूर्व में एजेंसियों के चयन और कार्य आवंटन की प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी भी मांगी है.
सीआईडी ने आयोग से जानना चाहा है कि वर्तमान एजेंसी को कौन-कौन से कार्य सौंपे गए थे. इसके अलावा परीक्षा नियंत्रक को सौंपे गए कार्यों की विस्तृत जानकारी भी मांगी गई है. आयोग से साक्ष्य के रूप में इससे संबंधित दस्तावेजों की छायाप्रति उपलब्ध कराने को कहा गया है. मालूम हो कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा में एजेंसी के रूप में टीडीपीएल का चयन किया गया था.
टीडीपीएल को उत्तर प्रदेश में परीक्षा और नियुक्तियों में लापरवाही बरतने के आरोप में ब्लैकलिस्ट किया गया था. इसके बावजूद जेपीएससी में उक्त एजेंसी को परीक्षा और नियुक्ति से संबंधित कार्य सौंप दिए गए. हालांकि, आयोग के पूर्व अध्यक्ष ने दावा किया है कि जब टीडीपीएल का चयन किया गया था, उस समय वह ब्लैकलिस्टेड नहीं थी. जेपीएससी में पहले किसी परीक्षा के लिए आवेदन आमंत्रित करने, परीक्षा आयोजित कराने, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराने और परिणाम प्रकाशित करने की जिम्मेदारी अलग-अलग एजेंसियों को दी जाती थी. वर्तमान में आवेदन आमंत्रित करने से लेकर परिणाम प्रकाशित करने तक की पूरी जिम्मेदारी एक ही एजेंसी को दिए जाने का आरोप है.
