रांची से अभिषेक आनंद की रिपोर्ट
रांची : झारखंड हाईकोर्ट द्वारा रद्द किए गए 4 प्रमुख परीक्षाओं में स्टे (रोक) लगाने के बाद अभ्यर्थियों और छात्र नेताओं में गहरा आक्रोश व्याप्त है. छात्रों ने इस फैसले के लिए सीधे तौर पर राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. छात्र नेता दीनबंधु और याचिकाकर्ता प्रेम कुमार का कहना है कि सरकार ने इस संवेदनशील मामले में कोर्ट के समक्ष बेहद ढुलमुल रवैया अपनाया. जिसकी वजह से आज मेहनत करने वाले छात्र खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.
महाधिवक्ता की अनुपस्थिति पर उठाए सवाल
छात्रों का मुख्य आरोप है कि हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के महाधिवक्ता (Advocate General) खुद अदालत में मौजूद नहीं थे. छात्रों के अनुसार, महाधिवक्ता की गैरमौजूदगी के कारण सीआईडी (CID) जांच की रिपोर्ट और एसओपी (SOP) के उल्लंघन से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण साक्ष्य और दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश ही नहीं किए जा सके. छात्रों का कहना है कि यदि सरकार अपने सबसे बड़े वकील के माध्यम से छात्रों का पक्ष मजबूती से पक्ष रखती, तो स्थिति कुछ और होती.
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क्या है पूरा मामला
पूरा मामला छात्रों के 26 दिनों के लंबे आंदोलन से जुड़ा है. छात्रों के तीव्र आंदोलन को देखते हुए सरकार ने सबसे पहले जेएसएससी सीजीएल और टीडीपीएल ऐजेंसी द्वारा ली गई सभी परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला सुनाया. इसके ठीक एक दिन सरकार ने अधिसूचना जारी करते हुए एक साथ 22 परीक्षाओं को रद्द कर दिया. इसमें सीजीएल के साथ साथ 11वीं-13वीं JPSC, फूड सेफ्टी ऑफिसर, CDPO जैसी नियुक्तियां भी शामिल थीं. इन नियुक्तियों के रद्द होने के बाद चयनित छात्र उग्र हो गए और सरकार के इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी. हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए इन 4 परीक्षाओं के रद्दीकरण पर स्टे लगा दिया. अदालत ने इसे 'नेचुरल जस्टिस' (प्राकृतिक न्याय) के सिद्धांत का उल्लंघन माना, क्योंकि पूर्व में चयनित उम्मीदवारों को कोई कारण बताओ नोटिस जारी किए बिना या उनका पक्ष सुने बिना ही सीधे नौकरी से हटा दिया गया था.
नवनियुक्त अफसरों की ट्रेनिंग रोकने की मांग
सरकार के ढुलमुल रवैये से नाराज आंदोलन कर रहे छात्रों ने उग्र रुख अख्तियार कर लिया है. छात्रों की मांग है कि JPSC व अन्य परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त हुए अधिकारियों की जारी ट्रेनिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए. छात्रों को आशंका है कि इनमें से कई अधिकारी प्रशासनिक और पुलिस सेवा में तैनात हैं, जो पद का प्रभाव इस्तेमाल कर जारी जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं. छात्रों ने स्पष्ट किया है कि वे इस ढिलाई को बर्दाश्त नहीं करेंगे और सरकार से मांग करते हैं कि आगामी 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में महाधिवक्ता खुद उपस्थित रहें और सभी सबूतों व सीआईडी जांच रिपोर्ट के साथ सरकार का पक्ष पूरी मजबूती से रखें.
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