रांची/ग्वालियर : दशरथ मांझी से प्रेरणा लेकर झारखंड के गोड्डा जिला से अपनी गर्भवती पत्नी को स्कूटर पर बिठाकर 1,300 किलोमीटर का सफर तय करके डीएलएड की परीक्षा दिलाने ग्वालियर पहुंचे धनंजय कुमार और उनकी पत्नी को अब कष्टकारी यात्रा नहीं करनी पड़ेगी. इनकी वापसी के लिए हवाई जहाज का टिकट बुक करा दिया गया है. 16 सितंबर को यह दंपती हवाई जहाज से झारखंड लौटेंगे.
इस आदिवासी दंपती के संघर्ष को देखते हुए इनके लिए हवाई यात्रा का इंतजाम अडानी फाउंडेशन ने किया है. धनंजय (27) ने बताया, ‘अडानी ग्रुप के फाउंडेशन की ओर से हमें ग्वालियर से रांची की हवाई यात्रा का टिकट मिल गया है. यह टिकट 16 सितंबर का है. ग्वालियर से रांची के लिए सीधी उड़ान नहीं है, इसलिए हम दोनों हैदराबाद होकर रांची पहुंचेंगे. इसके बाद रांची से सड़क मार्ग से गोड्डा जायेंगे.’
गोड्डा के जिलाधिकारी ने इसका इंतजाम किया है. धनंजय ने बताया, ‘मेरे स्कूटर को भी भेजने का इंतजाम अडानी फाउंडेशन करेगा.’ धनंजय ने कहा कि ग्वालियर प्रशासन ने परीक्षा केंद्र के पास रहने का इंतजाम कर दिया है. उसने बताया कि गोड्डा में ही कुछ लोगों ने नौकरी की व्यवस्था करने की बात भी कही है. धनंजय ने ग्वालियर आने के लिए पत्नी के जेवर गिरवी रखकर 10,000 रुपये उधार लिये थे.
कोरोना महामारी के कारण ट्रेन और बस सहित यात्रा का कोई साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण झारखंड के गोड्डा से धनंजय अपनी गर्भवती पत्नी सोनी हेम्ब्रम (22) को स्कूटर पर बिठाकर डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) की परीक्षा दिलाने के लिए 30 अगस्त को ग्वालियर पहुंचा था. इस सफर के दौरान उसने बारिश और खराब सड़कों का भी सामना किया और तीन दिन में करीब 1300 किलोमीटर का सफर तय किया.
मामला सामने आने के बाद ग्वालियर प्रशासन ने इस दंपती की मदद की और अडानी फाउंडेशन ने हवाई मार्ग से उनको वापस भेजने का इंतजाम भी कर दिया. पत्नी के शिक्षक बनने का सपना साकार करने के उद्देश्य से धनंजय ने स्कूटी से इतना लंबा सफर तय करने का निश्चय किया था. उसने बताया है कि उसे बिहार के गया जिला के दशरथ मांझी से प्रेरणा मिली, जिन्होंने अपनी पत्नी की वजह से पहाड़ काटकर सड़क तैयार कर दी थी.
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Posted By : Mithilesh Jha
