रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Jharkhand Teacher Recruitment, रांची: हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति-2016 में हुए कथित गड़बड़ियों की जांच कर रही एक सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमीशन (Fact Finding Commission) ने झारखंड सरकार और जेएसएससी (JSSC) के रवैये पर सख्त रुख अपनाया है. शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान कमीशन के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने सरकार द्वारा पेश किए गए अभ्यर्थियों के डेटा को ‘अधूरा’ बताते हुए खारिज कर दिया और पूरी रिपोर्ट विषयवार और कोटिवार अलग-अलग शपथ पत्र (Affidavit) के माध्यम से दाखिल करने का कड़ा निर्देश दिया है.
कमीशन की दोटूक: विषयवार और कोटिवार दें पूरा ब्योरा
कमीशन के समक्ष माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद और जेएसएससी के उप सचिव बशीर अहमद उपस्थित हुए थे. सुनवाई के दौरान जब सरकार की ओर से नियुक्त अभ्यर्थियों का डेटा पेश किया गया, तो जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने उस पर नाराजगी जताई. कमीशन ने कहा कि सरकार ने अभ्यर्थियों की नियुक्ति से संबंधित विवरण को अलग-अलग श्रेणी में देने के बजाय संयुक्त (Combined) रूप से मिलाकर दे दिया है, जिससे स्पष्टता नहीं मिल रही है. कमीशन ने निर्देश दिया कि सभी नियुक्त शिक्षकों का पूर्ण विवरण पूरी तरह स्पष्ट, विषयवार (Subject-wise) और कोटिवार (Category-wise) अलग-अलग करके प्रस्तुत किया जाए.
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कमीशन ने पूछे तीन तीखे सवाल, शपथ पत्र में मांगा जवाब
जांच को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने के लिए कमीशन ने राज्य सरकार और जेएसएससी से मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर पूरी जानकारी मांगी है. उन्होंने पूछा कि 18 सितंबर 2019 से लेकर 2 अगस्त 2022 के बीच कुल कितने अभ्यर्थियों को हाईस्कूल शिक्षक के पद पर नियुक्त किया गया है? दूसरा सवाल ये था कि निर्धारित कुल 17,786 सीटों में से अब तक वास्तव में कितनी नियुक्तियां पूरी की जा चुकी हैं? तीसरा सवाल ये था कि कुल सीटों में से कितनी सीटें अभी भी खाली (रिक्त) बची हुई हैं? कमीशन ने साफ किया है कि यह सारा ब्योरा अगली सुनवाई यानी 27 जून तक हर हाल में आधिकारिक शपथ पत्र के साथ आयोग के समक्ष प्रस्तुत करना होगा. इस दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता और अधिवक्ता राजेश कुमार ने अदालत में पक्ष रखा.
क्या है पूरा मामला?
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने वर्ष 2016 में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के जरिए हाईस्कूल शिक्षकों के 17,786 पदों पर बहाली निकाली थी. आरोप है कि इस नियुक्ति प्रक्रिया में जिला स्तरीय मेरिट और राज्य स्तरीय मेरिट के घालमेल के कारण भारी विसंगतियां आ गईं. इसके चलते सैकड़ों ऐसे योग्य अभ्यर्थी चयन से वंचित रह गए, जिनके अंक आधिकारिक कट-ऑफ (Cut-off) से भी अधिक थे. अपनी नियुक्ति और हक की मांग को लेकर प्रार्थी मीना कुमारी और अन्य की ओर से हाईकोर्ट में कुल 258 याचिकाएं दायर की गईं. झारखंड हाईकोर्ट की एकल पीठ (Single Bench) ने इन याचिकाओं पर गंभीर रुख अपनाते हुए पूरे मामले की तह तक जाने के लिए रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की अध्यक्षता में एक सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमीशन का गठन किया था. हाईकोर्ट ने इस कमीशन को तीन महीने के भीतर अपनी जांच पूरी कर राज्य सरकार को फाइनल रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है.
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