Jharkhand Teacher Recruitment Case, रांची: झारखंड में वर्ष 2016 की स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा में हुई अनियमितताओं की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमीशन ने अपनी कार्यवाही शुरू कर दी है. शनिवार को डोरंडा स्थित हाईकोर्ट के पुराने भवन में जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने इस मामले की पहली सुनवाई की. कमीशन ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को स्टेट मेरिट लिस्ट, नियुक्त अभ्यर्थियों के नाम, उनके प्राप्तांक और नियुक्ति की वास्तविक तिथि का विस्तृत विवरण शपथ पत्र के साथ दाखिल करने का निर्देश दिया है.
क्या है कमीशन की जांच का मुख्य केंद्र?
कमीशन मुख्य रूप से इस बात की पड़ताल करेगा कि क्या जेएसएससी ने सुप्रीम कोर्ट के 2 अगस्त 2022 के आदेश के बाद संशोधित योग्यता सूची सही तरीके से तैयार की थी? जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या याचिकाकर्ताओं से कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को समायोजित किया गया है और क्या अनुपस्थित रहे अभ्यर्थियों की रिक्तियों को कम योग्यता वाले उम्मीदवारों से भरा गया. इसके अलावा, 17,784 विज्ञापित रिक्तियों के मुकाबले केवल 12,046 परिणामों के प्रभावी होने के कारणों की भी जांच होगी.
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दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
सुनवाई के दौरान माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद और जेएसएससी के उप सचिव बशीर अहमद उपस्थित रहे. कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार अंतिम निर्णय लेगी. इसमें वास्तविक अभ्यर्थियों की नियुक्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ अयोग्य अभ्यर्थियों को हटाने और गड़बड़ी के दोषी अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय या आपराधिक कार्रवाई करने का प्रावधान शामिल है.
क्या है पूरा मामला
बता दें कि वर्ष 2016 में 17,786 पदों पर बहाली शुरू हुई थी. आरोप है कि जिला और राज्य स्तरीय मेरिट के फेर में सैकड़ों ऐसे अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए, जिनके अंक कट-ऑफ से अधिक थे. इसी के बाद मीना कुमारी व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस जांच कमीशन का गठन किया है. मामले की अगली सुनवाई अब 9 मई को होगी.
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