रांची : झारखंड हाईकोर्ट द्वारा वर्तमान निबंधक प्रशांत पांडेय को स्टे ऑर्डर दिए जाने के बावजूद नवनियुक्त निबंधक रंजीत चौधरी के पदभार ग्रहण (योगदान) करने काउंसिल कार्यालय पहुंचने से स्टेट फार्मेसी काउंसिल में प्रशासनिक घमासान काफी तेज हो गया.
सरकार का आदेश और कोर्ट का स्टे ऑर्डर
स्वास्थ्य विभाग द्वारा 17 अगस्त को रंजीत चौधरी को निबंधक सह सचिव बनाने का आदेश जारी किया गया था. इस आदेश के बाद 18 अगस्त को रंजीत चौधरी अपना पदभार ग्रहण करने काउंसिल कार्यालय पहुंचे थे, लेकिन वर्तमान निबंधक प्रशांत पांडेय के अनुपस्थित रहने के कारण उन्हें 21 अगस्त को आयोजित एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक के बाद योगदान कराने का आश्वासन दिया गया था.
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एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक और कुर्सी का विवाद
काउंसिल अध्यक्ष विमलेश दुबे के निर्देश पर रंजीत चौधरी शुक्रवार को एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में पहुंचे. हालांकि, वहां उन्हें कोर्ट के आदेश का हवाला देकर वापस लौटा दिया गया. प्रशांत पांडेय ने सरकार के तबादला आदेश के खिलाफ अदालत का रुख किया था, जहां से उन्हें स्टे ऑर्डर मिल गया है. इस वजह से काउंसिल की जिम्मेदारी फिलहाल प्रशांत पांडेय के पास ही बनी रहेगी. इस पूरे घटनाक्रम पर रंजीत चौधरी का कहना है कि उन्हें एग्जीक्यूटिव कमेटी का पत्र मिला है, लेकिन कोर्ट के स्टे ऑर्डर की कोई प्रति नहीं दी गई है और उन्होंने इस स्थिति से सरकार को अवगत करा दिया है.
काउंसिल दफ्तर में छात्रों और गार्ड्स में तीखी झड़प
इसी बीच शुक्रवार को काउंसिल कार्यालय में दिनभर भारी हंगामा और गहमागहमी का माहौल बना रहा. 'झारखंड फार्मेसी छात्र संघ' का एक प्रतिनिधिमंडल नवनियुक्त निबंधक रंजीत चौधरी से मुलाकात करने पहुंचा था. एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक चलने का हवाला देकर सुरक्षाकर्मियों ने छात्रों को दफ्तर के भीतर प्रवेश करने से रोक दिया. अंदर जाने की जिद पर अड़े छात्रों और सुरक्षा गार्डों के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई. प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया है कि काउंसिल प्रशासन ने अनियमितताओं को छिपाने और छात्रों को रोकने के लिए निजी एजेंसियों के बाउंसरों को तैनात कर रखा है.
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