राज्यसभा चुनाव: विधानसभा में माननीयों के हर वोट की निगहबानी, ऐसे की जा रही गतिविधियों की निगरानी

Rajya Sabha Election: झारखंड विधानसभा में राज्यसभा चुनाव के दौरान सभी दलों ने अपने एजेंट तैनात किए हैं. विधायकों को मतदान के बाद पार्टी एजेंट को वोट दिखाना अनिवार्य है, अन्यथा वोट अवैध हो सकता है. भाजपा, झामुमो, कांग्रेस समेत सभी दल अपने विधायकों के मतदान पर नजर बनाए हुए हैं. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

Rajya Sabha Election: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार को विधानसभा में मतदान जारी है. मतदान के साथ-साथ राजनीतिक दलों की नजर अपने-अपने विधायकों पर भी बनी हुई है. किस पार्टी का विधायक किस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर रहा है, इस पर निगरानी रखने के लिए सभी दलों ने अधिकृत एजेंटों की तैनाती की है. राजनीति में भरोसा बड़ी चीज होती है, लेकिन चुनाव आते ही भरोसे के साथ निगरानी भी मुफ्त में जुड़ जाती है.

कांग्रेस और झामुमो ने वरिष्ठ नेताओं को दी जिम्मेदारी

कांग्रेस ने अपने विधायकों के मतदान की निगरानी के लिए प्रदेश प्रभारी के राजू, सह-प्रभारी बेला प्रसाद और राज्यसभा सांसद डॉ. नासिर हुसैन को एजेंट बनाया है. वहीं झामुमो की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय, फागू बेसरा और पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर को जिम्मेदारी सौंपी गई है. इंडिया गठबंधन के अन्य दलों में माले ने हलधर महतो और गीता मंडल को एजेंट नियुक्त किया है, जबकि राजद की ओर से भोला यादव को यह जिम्मेदारी दी गई है.

भाजपा, आजसू, जदयू और लोजपा ने भी लगाए एजेंट

एनडीए की ओर से भाजपा ने अमर बाउरी, नवीन जायसवाल, अनंत ओझा और भानु प्रताप शाही को एजेंट बनाया है. लोजपा की तरफ से वीरेंद्र प्रधान और अनिल कुमार को अधिकृत प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है. आजसू पार्टी ने हरिश और ओम वर्मा को एजेंट बनाया है, जबकि जदयू की ओर से सागर कुमार और दुष्यंत पटेल को यह जिम्मेदारी दी गई है. हालांकि जेएलकेएम की ओर से अभी तक एजेंट के नाम तय नहीं किए गए हैं.

वोट दिखाना अनिवार्य, नहीं तो वोट हो सकता है अवैध

राज्यसभा चुनाव में मतदान करने वाले विधायकों के लिए कुछ विशेष नियम भी लागू हैं. प्रत्येक विधायक को मतदान करने के बाद अपने दल के अधिकृत एजेंट को बैलेट पेपर दिखाना अनिवार्य है. यदि कोई विधायक अपने पार्टी एजेंट को वोट नहीं दिखाता है, तो उसका वोट अवैध घोषित किया जा सकता है.

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व्हिप नहीं, लेकिन एजेंट को वोट दिखाना जरूरी

राज्यसभा चुनाव विधानसभा के बाहर होने वाला चुनाव माना जाता है, इसलिए इसमें राजनीतिक दलों का व्हिप लागू नहीं होता. इसका मतलब है कि विधायक अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी उम्मीदवार को वोट दे सकता है. हालांकि मतदान के बाद पार्टी के अधिकृत एजेंट को वोट दिखाना अनिवार्य है. इसी कारण राज्यसभा चुनाव में मतदान के साथ-साथ हर वोट की निगहबानी भी उतनी ही अहम हो जाती है, क्योंकि यहां एक-एक मत और एक-एक संकेत चुनावी नतीजों की दिशा बदलने की क्षमता रखते हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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