राज्यसभा चुनाव: प्रणव झा की हार के बाद कांग्रेस में बौखलाहट, बोले के राजू - आरजेडी और माले ने हमें दिया धोखा

Rajya Sabha Election: झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी प्रणव झा की हार के बाद कांग्रेस प्रभारी के राजू ने आरजेडी और माले पर धोखा देने का आरोप लगाया. विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने भी सहयोगी दलों पर सवाल उठाए. परिणाम के बाद महागठबंधन में मतभेद खुलकर सामने आए. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

रांची से आनंद मोहन की रिपोर्ट

Rajya Sabha Election: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजे गुरुवार 18 जून 2026 को घोषित कर दिए गए. चुनाव में झामुमो समर्थित उम्मीदवार बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी ने जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा. नतीजों के सामने आते ही महागठबंधन के भीतर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.

प्रणव झा की हार पर के राजू का बड़ा आरोप

कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के राजू ने सहयोगी दलों राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और भाकपा माले पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि आरजेडी और माले के विधायकों ने कांग्रेस के साथ धोखा किया है, जिसकी वजह से पार्टी समर्थित उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सके. के राजू का कहना है कि अगर गठबंधन के सभी सहयोगी दल पूरी मजबूती के साथ साथ खड़े रहते, तो परिणाम अलग हो सकता था. उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है.

दीपिका पांडेय सिंह ने भी उठाए सवाल

कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने भी प्रणव झा की हार के लिए आरजेडी और माले को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि महागठबंधन की मजबूती का दावा करने वाले सहयोगी दलों को अपने रुख को स्पष्ट करना चाहिए. दीपिका पांडेय के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने इंडिया गठबंधन के भीतर असहजता बढ़ा दी है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विवाद का असर भविष्य में गठबंधन की रणनीति पर भी पड़ सकता है.

बैजनाथ राम और परिमल नथवानी ने दर्ज की जीत

81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में हुए मतदान में झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम को सबसे अधिक 31 वोट मिले और वह राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे. दूसरी सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी ने जीत दर्ज की. परिमल नथवानी को कुल 30 वोट मिले थे, लेकिन इनमें से दो मत रद्द कर दिए गए. इस तरह उन्हें 28 वैध वोट प्राप्त हुए. वहीं, कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 20 वोट मिले, जिनमें एक वोट अमान्य घोषित कर दिया गया. कुल 81 मतों में तीन वोट रद्द हुए. अंतिम गणना में बैजनाथ राम को 31 और परिमल नथवानी को 28 वैध वोट मिले, जबकि प्रणव झा केवल 19 वैध वोटों तक ही सीमित रह गए.

महागठबंधन के पास थे 56 विधायक

झारखंड विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन है. इनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, आरजेडी के चार और भाकपा माले के दो विधायक शामिल हैं. संख्या बल के लिहाज से गठबंधन मजबूत स्थिति में था और कांग्रेस को उम्मीद थी कि वह दोनों सीटों पर जीत दर्ज कर लेगा. लेकिन चुनाव परिणाम ने इन दावों को झटका दे दिया. अब कांग्रेस नेताओं के आरोपों के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या महागठबंधन के भीतर सबकुछ ठीक है या फिर राज्यसभा चुनाव ने अंदरूनी मतभेदों को उजागर कर दिया है.

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परिणाम के बाद बढ़ सकती है राजनीतिक खींचतान

राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने झारखंड की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित खींचतान के संकेत दे दिए हैं. कांग्रेस नेताओं द्वारा सहयोगी दलों पर लगाए गए आरोपों के बाद आने वाले दिनों में महागठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर और बयानबाजी देखने को मिल सकती है. फिलहाल, चुनावी हार के बाद कांग्रेस जवाब तलाशने में जुटी हुई है और सहयोगी दलों की भूमिका पर सवाल खड़े कर रही है.

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लेखक के बारे में

Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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