Jharkhand Politics: हरियाणा में बदली चुनाव की तारीख, झारखंड में झामुमो-भाजपा आमने-सामने

Jharkhand Politics: हरियाणा में चुनाव की तारीख बदले जाने के मुद्दे पर झारखंड में राजनीति गरम हो गई है. झामुमो और भाजपा आमने-सामने आ गए हैं.

Jharkhand Politics: हरियाणा विधानसभा चुनाव की तारीख बदले जाने के बाद झारखंड की दो प्रमुख पार्टियां आमने-सामने आ गईं हैं. सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इशारे पर काम कर रहा है. वहीं, मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा है कि चुनाव को कौन प्रभावित कर रहा है, यह सब जानते हैं.

भाजपा के इशारे पर काम कर रहा चुनाव आयोग : सुप्रियो भट्टाचार्य

झामुमो के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने हरियाणा विधानसभा चुनाव की तिथियों को बदलने पर चुनाव आयोग पर निशाना साधा. कहा कि मुझे इस बात की आशंका पहले से थी. तिथि बदलने के लिए हरियाणा के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ोली ने भी आयोग को पत्र लिखा था.

हरियाणा में 1 अक्टूबर 2024 को विधानसभा चुनाव होना था. अब मतदान 5 अक्टूबर को होगा. चुनाव आयोग के अनुसार, मतगणना 8 अक्तूबर को होगी. झामुमो प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त अपने तर्कों के कारण लाफ्टर चैनल के कैरेक्टर बन गये हैं. हरियाणा में चुनाव की तिथियों को भाजपा के इशारे पर तय किया गया था, जिसे अब बदलना पड़ा.

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि हरियाणा में चुनाव की तारीखों का निर्धारण और फिर इसे बदला जाना चुनाव आयोग की निष्पक्षता और गंभीरता पर सवाल खड़े करता है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग भाजपा के डिक्टेशन के अनुसार चलता है. आयोग का यही रवैया तीनों चुनावों (लोकसभा, विधानसभा और राज्यसभा) में दिखता है.

चुनाव को प्रभावित करना चाहती है भाजपा : झामुमो

झामुमो नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा अपनी गलत मंशा से चुनाव को प्रभावित करना चाहती है. यह एक गंभीर समस्या है. मुझे आशंका थी कि यह होगा, क्योंकि चुनाव आयोग की नस-नस पकड़ में आ चुकी है. लोकसभा चुनाव के पहले चुनाव आयुक्त ने इस राज्य का दौरा तक नहीं किया. भीषण गर्मी में 4 चरणों में लोकसभा चुनाव कराए गए. इसके बाद माफी मांगी गयी. कहा कि एडीआर की रिपोर्ट है कि पोल वोट से अधिक काउंट वोट है. जांच कराने के लिए कहा गया, लेकिन इस पर भी चुप्पी साध ली गयी.

चुनाव को कौन प्रभावित कर रहा है, सब जानते हैं : आदित्य साहू

दूसरी तरफ, भाजपा के प्रदेश महामंत्री सह सांसद आदित्य साहू ने झामुमो के सुप्रियो भट्टाचार्य की प्रेसवार्ता पर पलटवार किया. कहा कि झामुमो को आसन्न विधानसभा चुनाव में होनेवाली दिख रही है. इन्हें राज्य की समस्याओं से ज्यादा पड़ोसी राज्य दिखाई पड़ रहे हैं. टूटते-बिखरते झामुमो की पीड़ा का ठीकरा झामुमो के नेता चुनाव आयोग पर फोड़कर मन को शांत करना चाहते हैं.

आदित्य साहू ने कहा कि चुनाव आयोग ने हरियाणा चुनाव की तारीखों में परिवर्तन संवैधानिक प्रक्रिया के तहत किया है. चुनाव आयोग चुनाव प्रक्रिया पर निर्णय करने के लिए स्वतंत्र होता है. चुनाव आयोग के खिलाफ बोलना झामुमो की मजबूरी हो जाती है.

सभी दलों को ज्यादा प्रचार का मौका मिलेगा

आदित्य साहू ने याद दिलाया कि चुनाव आयोग की टीम के झारखंड दौरे पर यही झामुमो नेता दशहरा, दीपावली, छठ जैसे पर्व का उदाहरण देकर निर्धारित समय पर ही झारखंड में चुनाव कराने की मांग कर रहे थे. झामुमो को बताना चाहिए कि झारखंड के लोगों के लिए अगर पर्व, त्योहार महत्वपूर्ण है, तो फिर हरियाणा में चुनाव आयोग ने उत्सव के कारण थोड़े परिवर्तन किये , तो उन्हें क्यों आपत्ति है?

आदित्य साहू ने कहा कि झामुमो को पता होना चाहिए कि तिथियों में यदि एक्सटेंशन हुआ है, तो सभी दलों को ज्यादा प्रचार करने का मौका मिलेगा. सिर्फ भाजपा को नहीं. उन्होंने कहा कि पैसा और पावर से चुनाव को कौन प्रभावित करता है और कौन पैसा बांटता है, यह तो झामुमो विधायक समीर मोहंती के पत्र में सार्वजनिक हो गया था.

सांस्कृतिक उत्सव के कारण बदली तिथि : आदित्य साहू

आदित्य साहू ने कहा कि हरियाणा में चुनाव की तिथि वहां होनेवाले सांस्कृतिक उत्सव के कारण बदली गयी है. बिश्नोई समाज के गुरु जम्भेश्वर की याद में बड़ा उत्सव मनाया जाता है और उस उत्सव में हरियाणा से बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं. इसलिए भाजपा सहित हरियाणा की राष्ट्रीय लोकदल पार्टी ने भी चुनाव आयोग से तिथियों में पुनर्विचार का लिखित अनुरोध किया था. कहा कि सुप्रियो भट्टाचार्य को अपनी स्मरण शक्ति मजबूत करनी चाहिए. पता करना चाहिए कि कहीं कोई साइड इफेक्ट तो नहीं हो रहा है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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