झारखंड : नेत्र रोगियों के लिए वरदान हैं डॉ भारती कश्यप, इनके आई बैंक में होता है सबसे अधिक कॉर्निया ट्रांसप्लांट

Jharkhand News: झारखंड के आदिवासी बहुल इलाकों के नेत्र रोगियों के लिए डॉ भारती कश्यप किसी वरदान से कम नहीं. दुर्गम क्षेत्रों में कैंप लगाकर मरीजों की पहचान करतीं हैं. रांची लाकर उनका इलाज भी करतीं हैं. कभी अपने खर्चे पर, कभी सरकार की मदद से.

Jharkhand News: झारखंड में आंखों की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए डॉ भारती कश्यप एक वरदान हैं. खासकर आदिवासी बहुल इलाकों के लोगों के लिए. वह सारंडा से संताल परगना और कोल्हान से पलामू प्रमंडल तक पहुंचतीं हैं और लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करतीं हैं. आई चेकअप कैंप के साथ-साथ सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन अभियान भी चलातीं हैं. रांची के कश्यप मेमोरियल आई बैंक की मेडिकल डायरेक्टर के नेतृत्व में झारखंड का सर्वाधिक आई ट्रांसप्लांट उनके आई बैंक में ही होता है.

मोतियाबिंद की वजह से स्कूल छोड़ चुके बच्चों को फिर से स्कूल भेजा

डॉ भारती कश्यप लगातार 33 वर्षों से यह अभियान चला रहीं हैं. इस दौरान ट्राइबल बेल्ट में कई ऐसे बच्चे मिले, जिनकी आंखों की रोशनी कॉर्निया में खराबी की वजह से चली गई. बड़ी संख्या में ऐसे भी बच्चे मिले, जिनको मोतियाबिंद की वजह से अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी. ऐसे बच्चों को फिर से स्कूल भेजने का बीड़ा डॉ भारती और उनकी संस्था ने उठाया. अब तक सरकारी स्कूलों के 20 लाख से अधिक बच्चों की आंखों की स्क्रीनिंग कर चुकीं हैं. जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में चश्मा भी उपलब्ध करवाती हैं. मोतियाबिंद का ऑपरेशन अपने खर्च पर करतीं हैं.

10 साल से पूरे झारखंड में महिला स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

वह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की महिला डॉक्टर्स विंग की अध्यक्ष भी हैं. इस नाते महिला स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए पिछले 10 वर्षों से मेगा महिला स्वास्थ्य शिविरों का झारखंड के अलग-अलग हिस्से में आयोजन करतीं हैं. रांची के कश्यप मेमोरियल आई बैंक की मेडिकल डायरेक्टर हैं. उनके नेतृत्व में झारखंड में उनके द्वारा चलाये जा रहे आई बैंक में सर्वाधिक नेत्र प्रत्यारोपण होता है.

झारखंड को एक साल में 150 कॉर्निया ट्रांसप्लांट का लक्ष्य

पिछले 2 साल से आई बैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से झारखंड को प्रति वर्ष 150 नेत्र प्रत्यारोपण का लक्ष्य दिया जा रहा है. इन दो वर्षों में हर वर्ष दो तिहाई से ज्यादा आई ट्रांसप्लांट अकेले कश्यप मेमोरियल आई बैंक में होता है. वर्ष 2024 में झारखंड को 150 नेत्र प्रत्यारोपण का लक्ष्य मिला है. 11 महीने में इस आई बैंक में 107 नेत्र प्रत्यारोपण किये गये हैं.

डॉ भारती के प्रयासों से अब तक करीब 1000 कॉर्निया ट्रांसप्लांट

डॉ भारती कश्यप के प्रयासों से झारखंड में अब तक करीब 1,000 कॉर्निया ट्रांसप्लांट हो चुके हैं. सैकड़ों दृष्टिहीन की आंखों को रोशनी मिली है. इस तरह झारखंड में एक साल में जितने कॉर्निया प्रत्यारोपण होते हैं, उसमें 80 फीसदी कश्यप मेमोरियल आई बैंक में होता है. झारखंड के सुदूरवर्ती गांवों से आने वाले आदिवासी मरीजों का नेत्र/कॉर्निया प्रत्यारोपण आयुष्मान भारत योजना के तहत उनके अस्पताल में किया जाता है.

झारखंड : नेत्र रोगियों के लिए वरदान हैं डॉ भारती कश्यप, इनके आई बैंक में होता है सबसे अधिक कॉर्निया ट्रांसप्लांट.

आई डोनेशन अवेयरनेस क्लब भी चलाती हैं डॉ भारती कश्यप

डॉ भारती कश्यप आई डोनेशन अवेयरनेस क्लब भी चलाती हैं, जो कश्यप मेमोरियल आई बैंक की सहयोगी इकाई है. क्लब लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करता है. डॉ कश्यप के नेतृत्व में वर्ष 1991 में नेत्रदान के लिए लोगों को जागरूक करने का अभियान शुरू किया गया. सफलता वर्ष 1996 में मिली. तब झारखंड राज्य नहीं बना था. बिहार राज्य में किसी ने पहली बार नेत्रदान किया.

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90 के दशक में पहली बार बिहार में हुआ था 2 नेत्र प्रत्यारोपण

नेत्रदान करने वाले के मरणोपरांत मिली 2 आंखों ने 2 अलग-अलग लोगों की जिंदगी को रोशन किया. पहली बार बिहार में बारी-बारी से 2 नेत्र प्रत्यारोपण हुए. इसके बाद डॉ भारती कश्यप और उनके पति डॉ बीपी कश्यप ने मिलकर नेत्र जागरूकता अभियान के लिए मिशन मोड में काम करना शुरू कर दिया, जो आज भी जारी है. वह हर साल कई कैंपेन चलाती हैं, जिसमें आई डोनेशन कैंपेन, विजन फॉर झारखंड कैंपेन, ज्योत से ज्योत जलाओ कैंपेन, रूरल विजन कैंपेन, रन फॉर विजन, सर्वाईकल कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर इरैडिकेशन कैंपेन शामिल हैं.

नेत्रदान का संदेश देने के लिए 20 साल से कर रहीं ‘रन फॉर विजन’ का आयोजन

‘नारी शक्ति सम्मान’ से पुरस्कृत डॉ भारती कश्यप और उनकी संस्था 20 वर्षों से रांची में ‘रन फॉर विजन’ का आयोजन कर रही है. कई सालों तक ‘ब्लाइंड फोल्डेड मैराथन फॉर विजन’ का भी आयोजन किया. इसमें जोड़े में बच्चे दौड़ते हैं. यानी एक साथ दो बच्चे दौड़ लगाते हैं. एक बच्चे की आंख पर पट्टी बांध दी जाती है और दूसरे की आंख खुली रहती है. ब्लाइंड स्कूल के बच्चों को भी रेस में शामिल किया जाता है, ताकि संवेदनशीलता के साथ नेत्रदान का संदेश दिया जा सके.

झारखंड सरकार को इन्फ्रास्ट्रक्चर और मानव संसाधन पर नहीं करना पड़ता खर्च

कश्यप मेमोरियल आई बैंक की सक्रियता की वजह से नेत्र प्रत्यारोपण को लेकर झारखंड सरकार की भी टेंशन कम हो गई है. दो तिहाई से अधिक आई ट्रांसप्लांट इस आई बैंक में हो जाते हैं, जिससे सरकार को इन्फ्रास्ट्रक्चर या मानव संसाधन पर पैसे खर्च नहीं करने पड़ते.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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