रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Babulal Marandi, रांची : झारखंड में हुए कथित शराब घोटाले को लेकर कानूनी लड़ाई दोनों तेज हो गई है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग को लेकर झारखंड हाइकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है. याचिका में राज्य सरकार को निर्देश देने का आग्रह किया गया है कि वे इस हाई-प्रोफाइल घोटाले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपें, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.
'छत्तीसगढ़ मॉडल' पर बनी नीति
बाबूलाल मरांडी की ओर से दायर याचिका में राज्य की शराब नीति और निविदा प्रक्रिया (Tender Process) पर कई गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं. याचिका में कहा गया है कि झारखंड सरकार ने वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ के मॉडल को अपनाकर नई शराब नीति लागू की थी, जो शुरुआत से ही विवादों में रही. उनका आरोप है कि फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर दो पसंदीदा प्लेसमेंट एजेंसियों को करोड़ों का काम सौंप दिया गया. उनका मानना है कि शराब की बोतलों पर लगने वाले होलोग्राम बनाने वाली कंपनी, मैनपावर सप्लाई करने वाली एजेंसी और थोक (Wholesale) शराब का ठेका लेने वाली कंपनियों की भूमिका पूरी तरह संदिग्ध है और इन्होंने मिलकर राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया.
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IAS अधिकारी सहित कई हाई-प्रोफाइल लोग शामिल
नेता प्रतिपक्ष ने अदालत को अवगत कराया है कि इस महाघोटाले के तार शासन-प्रशासन के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों से जुड़े हैं. इसमें कई रसूखदार सफेदपोशों के साथ-साथ आईएएस (IAS) अधिकारी भी शामिल हैं. याचिका में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कछुआ चाल पर भी उंगली उठाई गई है. उन्होंने अपनी याचिका में बताया है कि वर्ष 2025 में ही एसीबी ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की थी. लेकिन लगभग 14 महीने बीत जाने के बाद भी एसीबी आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल नहीं कर पाई है. समय पर चार्जशीट दाखिल न होने के कारण मामले के मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी होने के बावजूद उन्हें आसानी से 'डिफॉल्ट बेल' (Default Bail) का लाभ मिल गया और वे जेल से बाहर आ गए. बाबूलाल मरांडी का तर्क है कि राज्य की एजेंसी के ढुलमुल रवैए के कारण इस मामले की निष्पक्ष जांच केवल सीबीआई ही कर सकती है.
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