रांची से सुनील चौधरी की रिपोर्ट
Jharkhand Legal Sand Mining, रांची: झारखंड में आम जनता और निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है. राज्य में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार कानूनी रूप से बालू (रेत) के उठाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है. शुक्रवार रात तक झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (JSPCB) ने 8 बालू घाटों को संचालन की अनुमति दे दी है. इसके साथ ही 13 बालू स्टॉकयार्डों को भी स्थापना और परिचालन की मंजूरी मिल चुकी है. खान विभाग ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए सभी स्वीकृत 8 घाटों और 13 स्टॉकयार्ड के लिए ऑनलाइन चालान आईडी (Challan ID) जेनरेट कर दिया है.
गोड्डा में उठान शुरू, रांची में अफसर न होने से फंसा पेंच
शनिवार को गोड्डा जिले में लीज होल्डर्स (पट्टाधारकों) ने एडवांस राशि जमा कर बालू की निकासी (खनन) का काम आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया है. हालांकि, राजधानी रांची में जिला खनन पदाधिकारी (DMO) के अपनी सीट पर मौजूद न रहने के कारण श्यामनगर बालू घाट के लिए एडवांस राशि जमा नहीं हो सकी. इसके बावजूद, लीज धारक ने किसी भी तरह की देरी से बचने के लिए घाट पर अपने कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया है. जानकारी के अनुसार, प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने 15 अन्य बालू घाटों को स्थापना की सहमति (CTE) दे दी है और उनके परिचालन (CTO) की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है.
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10 जून से पहले 19 और घाटों से शुरू होगा उठाव
झारखंड में कुल 444 बालू घाट हैं, जिनमें से 290 घाटों की नीलामी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. इनमें से 35 घाट ऐसे हैं जिनकी ग्राम सभा और अन्य औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और उन्हें पूर्व में ही पर्यावरणीय स्वीकृति (EC) मिल चुकी है. इन 35 में से 19 बालू घाटों की लीज डीड पर संबंधित जिलों के उपायुक्तों (DC) द्वारा हस्ताक्षर किए जा चुके हैं.
यहां लीज डीड पूरी
गोड्डा (2), जामताड़ा (1), रांची (2), बोकारो (2), जमशेदपुर (2), लातेहार (2), हजारीबाग (2), रामगढ़ (2), दुमका (2) और खूंटी (2) के घाटों की लीज डीड की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. विभाग के मुताबिक, इन 19 घाटों की भी स्थापना (CTE) और परिचालन (CTO) प्रक्रिया अंतिम दौर में है, जिससे 10 जून से पहले यहां से भी बालू का उठाव शुरू हो जाएगा.
मानसून और NGT की रोक से पहले स्टॉक करने की चुनौती
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के नियमों के मुताबिक, मानसून के दौरान नदियों के पारिस्थितिक तंत्र को बचाने के लिए 10 जून से 15 अक्टूबर तक बालू के उठाव पर पूरी तरह रोक लग जाती है. यही कारण है कि खान विभाग महज कुछ दिनों की इस मोहलत के भीतर युद्ध स्तर पर काम कर रहा है. विभाग की कोशिश है कि एनजीटी की रोक लागू होने से पहले 13 स्टॉकयार्डों में ज्यादा से ज्यादा बालू का स्टॉक कर लिया जाए, ताकि मानसून के चार महीनों में राज्य में कंस्ट्रक्शन और विकास कार्य बालू की किल्लत की वजह से न रुकें.
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