Jharkhand Ka Mausam: ठंडी हवा से कनकनी, शीतलहरी जैसे हालात, 5 जनवरी से और कांपेंगे झारखंड के लोग

Jharkhand Ka Mausam: 5 जनवरी से ठंड बढ़ेगी. घना कोहरा छाया रहेगा. मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है. दिन में बादल छाये रहेंगे. मौसम के शुष्क रहने की संभावना है. सोमवार से न्यूनतम तापमान में दो-तीन डिग्री की गिरावट देखने को मिल सकती है.

By Amitabh Kumar | January 4, 2026 8:19 AM

Jharkhand Ka Mausam: पश्चिमी विक्षोभ और हिमालय से बंगाल की खाड़ी तक चल रहे साइक्लोनिक सर्कुलेशन का प्रभाव झारखंड के मौसम पर पड़ा है. मौसम विभाग के अनुसार, रविवार की सुबह में रांची समेत 15 जिलों में घना कोहरा छाया रहेगा. संबंधित जिलों में गढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, देवघर, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ शामिल हैं. इसके बाद दिन में आकाश में बादल छाये रहने और मौसम के शुष्क रहने की संभावना है.

घने कोहरे के कारण इन जिलों में विजिबिलिटी 50 से 200 मीटर तक रहने की संभावना है. इससे सुबह में हवाई सेवा पर भी असर पड़ सकता है. मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, सोमवार से न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है. इससे ठंड बढ़ेगी और सुबह-शाम में कनकनी व शीतलहरी जैसी स्थिति बन सकती है.

कांके का न्यूनतम तापमान 6.2 डिग्री दर्ज

शनिवार को रांची का न्यूनतम तापमान 12.3 डिग्री सेल्सियस रहा, जिसमें पिछले 24 घंटे में 2.9 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज हुई. वहीं कांके का न्यूनतम तापमान 6.2 डिग्री, गुमला-6.6 डिग्री व मेदिनीनगर का 8.3 डिग्री रहा. जमशेदपुर का न्यूनतम तापमान 10.5 डिग्री, बोकारो-11.2 डिग्री, चाईबासा-11.6 डिग्री, खूंटी-9.4 डिग्री, लोहरदगा-10.1 डिग्री और लातेहार का 9.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. शनिवार को देवघर में विजिबिलिटी 450 मीटर और जमशेदपुर में 600 मीटर रही.

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पलामू में कड़ाके की ठंड

पलामू जिले में इन दिनों कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और पाले ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है. लगातार गिरते तापमान और कई दिनों तक धूप नहीं निकलने के कारण खेतों में नमी बनी हुई है. इसका सीधा असर सरसों, गेहूं, आलू समेत अन्य रबी फसलों पर पड़ रहा है. नमी के कारण फसलों में कीट और रोग तेजी से फैल रहे हैं, जिससे गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित होने की आशंका है. हालांकि किसान फसलों को बचाने के लिए सिंचाई और फफूंदनाशी दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन इससे खेती की लागत बढ़ गयी है. वहीं फसल खराब होने की आशंका से किसानों की चिंता भी बढ़ती जा रही है.