झारखंड में भूमि सर्वे में देरी पर हाइकोर्ट सख्त, राजस्व सचिव को 15 जुलाई तक नया शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने लंबित भूमि सर्वे मामले में राजस्व सचिव को 15 जुलाई तक नया शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. अदालत ने अवर सचिव द्वारा दाखिल शपथ पत्र पर नाराजगी जताई और सभी जिलों में भूमि सर्वे पूरा करने की समयसीमा मांगी है.

रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में वर्ष 1974-75 से लंबित भूमि सर्वे कार्य को पूरा कराने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राजस्व विभाग के अवर सचिव द्वारा दाखिल शपथ पत्र पर आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि जब पिछली सुनवाई में स्वयं राजस्व सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, तो अवर सचिव ने यह शपथ पत्र किस आधार पर दाखिल किया. खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया कि राजस्व सचिव स्वयं 15 जुलाई तक नए तथ्यों और अद्यतन जानकारी के साथ शपथ पत्र दाखिल करें. साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 जुलाई की तिथि निर्धारित की गई है.

सभी जिलों में सर्वे पूरा होने की समयसीमा बताने का निर्देश

इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह शपथ पत्र के माध्यम से यह स्पष्ट करे कि झारखंड के सभी जिलों में भूमि सर्वे का कार्य कब तक पूरा कर लिया जाएगा. अदालत ने इस कार्य की प्रगति और निर्धारित समयसीमा के संबंध में स्पष्ट जानकारी मांगी थी. हालांकि, सरकार की ओर से राजस्व सचिव के स्थान पर अवर सचिव ने शपथ पत्र दाखिल किया, जिस पर अदालत ने असंतोष व्यक्त करते हुए इसे गंभीरता से लिया और पुनः राजस्व सचिव को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया.

1974-75 में शुरू हुआ था सर्वे, आज तक नहीं हुआ पूरा

मामले में प्रार्थी गोकुल चंद ने जनहित याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया है कि झारखंड क्षेत्र में भूमि का अंतिम व्यापक सर्वे वर्ष 1932 में हुआ था. इसके बाद वर्ष 1974-75 में नए भूमि सर्वे की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन पांच दशक बीत जाने के बाद भी यह कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका. याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया है कि भूमि सर्वे कार्य पूरा करने के लिए सरकार के लिए निश्चित समयसीमा तय की जाए, ताकि सर्वे का कार्य जल्द पूरा हो सके और भूमि अभिलेखों को अद्यतन किया जा सके.

भूमि विवाद और हेराफेरी रोकने में मिलेगी मदद

याचिका में कहा गया है कि भूमि सर्वे पूरा होने से राज्य में जमीन के रिकॉर्ड अपडेट होंगे. इससे भूमि की प्रकृति, स्वामित्व और सीमांकन से संबंधित विवादों में कमी आएगी. साथ ही जमीन के मालिकाना हक में संभावित हेराफेरी और फर्जीवाड़े पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी. विशेषज्ञों का भी मानना है कि अद्यतन भूमि रिकॉर्ड होने से विकास परियोजनाओं, मुआवजा वितरण और राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी.

इसे भी पढ़ें: court news : वर्ष 1974 से राज्य में चल रहा भूमि सर्वे का काम कब तक पूरा होगा : हाइकोर्ट

नई तकनीक से सर्वे में लाई जा रही तेजी

पूर्व की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि भूमि सर्वे कार्य में तेजी लाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है. इसके लिए राज्य की तीन टीमें बिहार, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक भेजी गई हैं, जहां वे आधुनिक भूमि सर्वे तकनीकों का अध्ययन कर रही हैं. सरकार ने अदालत को यह भी बताया था कि इन तकनीकों को झारखंड में लागू कर सर्वे प्रक्रिया को तेज किया जाएगा. अब तक लातेहार और लोहरदगा जिलों में भूमि सर्वे का कार्य पूरा किया जा चुका है, जबकि अन्य जिलों में यह प्रक्रिया जारी है. हाईकोर्ट ने अब सरकार से सर्वे कार्य पूरा करने की स्पष्ट समयसीमा और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है.

इसे भी पढ़ें: Ranchi news : भूमि सर्वे से कई समस्याएं आ रहीं सामने, कोर्ट में बढ़ रहे मामले

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Kumarvishwat sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >